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One Nation One Election को लेकर पूरे देश में चर्चाओं के बाजार गर्म, जानें क्या है उत्तराखंड के लोगों की राय

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर पूरे देश में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चला है। केंद्र सरकार के द्वारा वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक कमेटी का भी गठन किया गया है। उत्तराखंड में भी इसको लेकर चर्चाएं हो रही हैं।

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर कमेटी का गठन

केंद्र सरकार के द्वारा वन नेशन वन इलेक्शन की ओर कदम बढ़ा दिए गए हैं। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर कमेटी का गठन किया गया है। जो केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट देगी। तो वहीं केंद्र सरकार के द्वारा 18 सितंबर से लेकर 23 सितंबर के बीच विशेष सत्र बुलाया गया है।

इस सत्र को लेकर चर्चा है कि केंद्र सरकार के द्वारा बुलाई गई विशेष सत्र में वन नेशन वन इलेक्शन पर सांसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद वन नेशन वन इलेक्शन कानून के रूप में मुहर लग सकती है।

वन नेशन वन इलेक्शन पर देशभर में हो रही चर्चा

कुछ तकनीकी विषय ऐसे हैं जिन पर वास्तव में आम लोग भी चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं। जिनमें अगर किसी राज्य में सरकार गिरेगी तो फिर उसे राज्य में कैसे दोबारा से चुनाव होंगे और कितने साल के लिए फिर सरकार का गठन होगा। इन विषयों पर चर्चा आम है। ऐसा नहीं है कि अब पहली बार देश में कानून बनने के बाद ही वन नेशन वन इलेक्शन होगा।

1951 से लेकर 1967 तक पूरे देश में होता था एक साथ चुनाव

1951 से लेकर 1967 तक देश में लोकसभा के साथ सभी राज्यों में विधानसभा चुनाव एक साथ होते आए थे। लेकिन अब वन इलेक्शन वन नेशन के तहत लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव राज्यों में एक साथ होना चर्चा का विषय बना हुआ है। वन नेशन वन इलेक्शन का सबसे बड़ा फायदा यही है कि जो आम जनता के खजाने से अलग – अलग चुनाव कराने पर खर्चा आता है उसे बचाया जा सकता है।

सीएम धामी और मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने की फैसले की सराहना

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केंद्र सरकार की फैसले की सराहना करते हुए नजर आ रहे हैं। तो वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल भी सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कह रहे हैं कि पहले भी देश में वन नेशन वन इलेक्शन के तहत चुनाव हुए हैं।

उत्तराखंड कांग्रेस ने भी किया फैसले का स्वागत

वहीं उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं की बात करें तो उत्तराखंड के कई कांग्रेसी नेता इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं कि देश में एक साथ विधानसभा और लोकसभा के चुनाव होंगे। लेकिन कुछ दुविधा कांग्रेस के नेताओं को नजर आ रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कुछ तकनीकी पहलू जरूर इसको लेकर है जिन पर संसद में विस्तार से चर्चा होनी जरूरी है।

विशेष सत्र के बाद जनता को मिलेंगे सवालों के जवाब

वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर पूरे देश में जहां चर्चाओं का बाजार गर्म है। तो वहीं 18 सितंबर से लेकर 23 सितंबर के बीच जो विशेष सत्र संसद में होने जा रहा है। उसमें कई सवालों के जवाब भी आम जनता को मिल जाएंगे।

कि केंद्र सरकार किस तरीके से वन नेशन वन इलेक्शन के तहत चुनाव कराने को लेकर बिल लेकर आने वाली है ऐसे में देखना यही होगा आखिर क्या कुछ प्रावधान वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर होते हैं और जो सवाल आम जनता के मन में भी उठ रहे हैं उनका जवाब केंद्र सरकार संसद में कैसे देती है।

इनपुट – मनीष डंगवाल

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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