केंद्र सरकार में खाली हैं पौने 9 लाख पद, युवा सड़कों पर और सरकार मस्त…देखिए आंकड़ें

रोजगार का मुद्दा इस समय देशभर में उठा हुआ है. जिन राज्यों में चुनाव है उन राज्यों के नेताओं का भी अहम मुद्दा रोजगार ही है। रोजगार बेरोजगारी को लेकर जमकर एक दूसरे पर वार पलटवार का खेल भी सियासी पारे की तरह ऊपर चढ़ने लगा है। रोजगार का वादा कर वोट मांगे जा रहे हैं लेकिन इसमे फजीहत सिर्फ और सिर्फ युवाओं की हो रही है जो कई सालों से भर्ती की तैयारियां कर रहे हैं। कोचिंग में पैसा खर्च कर रहे हैं. घर से परिवार से दूर रहकर पार्टनरशिप में कमरा लेकर पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन सरकार युवाओं के साथ छलावा कर रही है। नौकरी ना लगने से हताश होकर युवा आत्मघाती कदम उठा रहे हैं और सरकार मस्त है।

केंद्रीय सेवाओं में पौने 9 लाख से ज्यादा पद खाली, सरकार मस्त

आपको आंकड़ों को जानकर हैरानी होगी कि केंद्रीय सेवाओं में पौने नौ लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं. युवा सड़कों पर है और सरकार के मुआइंदे मुलायम सोफे-कुर्सी पर बैठकर मस्त हैं। युवाओं के दिल की चुभन भला मुलायम कुर्सी सोफे में बैठने वाले क्या जाने।

ये है सरकारी आंकड़ें

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने गुरुवार को राज्‍यसभा में जानकारी दी कि 1 मार्च, 2020 तक केंद्र सरकार के विभागों में 8.72 लाख से अधिक रिक्त पद थे. कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार 1 मार्च, 2019 तक केंद्र सरकार के विभागों में 9,10,153 रिक्तियां और 01 मार्च, 2018 तक 6,83,823 रिक्तियां मौजूद थीं. लिखित उत्तर में कहा गया है कि 1 मार्च, 2020 तक केंद्र सरकार के विभागों में 8,72,243 रिक्त पद थे. तीन प्रमुख भर्ती एजेंसियों-कर्मचारी चयन आयोग, संघ लोक सेवा आयोग और रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने 2018-19 और 2020-21 के दौरान 2,65,468 भर्तियां की हैं.

क्या चुनावी साल 2024 के लिए प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार बनाने के लिए इन पदों को बचाया?

आपको बता दें कि खाली रिक्त पदों के बारे में ये जानकारी हमारी नहीं है बल्कि संसद में सरकार ने खुद दी है जिससे सरकार पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत के द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने ये लिखित में आकड़ा पेश किया था। अब सवाल ये है कि जब लाखों पद खाली पड़े हैं और देश में 70 साल में पहली बार बेरोजगार नौजवानों का आंकड़ा 3 करोड़ के पार है फिर भी सरकार क्यों इन पदों पर कुंडली मार कर बैठी हुई है। सवाल ये भी है कि क्या सरकार धीरे धीरे सब प्राइवेट हाथों में सौंपना चाहती है? जिसके लिए ये भर्तियां बन्द हैं या चुनावी साल 2024 में प्रधानमंत्री अपनी सरकार बनाने के लिए इन पदों को बचा कर रखे हैं।

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