विस्थापन की श्रेणी मे रखे गए झलिया गांव के ग्रामीणों ने बिताई घर से बाहर रात

प्रतीक चित्र
 चमोली – साल 2013 की आपदा में जख्मी झलिया गांव के जख्मों को सरकार ने इलाज की सूची में तो रखा लेकिन आज तक उनका विस्थापन की दवा से इलाज नहीं किया। नतीजा ये हुआ की बीती रात पहाड़ी पर बना जख्म नासूर बन कर भरभरा कर गांव के ऊपर गिर पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पहाड़ी दरकने से जहां दो घर जमीदोज हो गए वहीं गांव की ओर जाने वाला रस्ते को पहाड़े से नकले  मलबे ने अपने बोझ तले दबा दिया। जबकि खबर है कि तकरीबन एक दर्जन घरों में मलबा घुस गया है। खबर ये भी है कि दहशतजदा गांव वालों ने मजबूरी में घर से बाहर दूर सुरक्षित स्थान पर रात गुजारी। मौका मुआयने के लिए प्रशासन की टीम रवाना हो गई है।
घटना बीती रात करीब दस बजे की बताई जा रही है। देवाल ब्लाक के झलिया गांव के पास वाली पहाड़ी से गडग़ड़हाट की आवाज से लोग घबरा कर घरों सें बाहर निकल आए। इतनी देर में मलबा पहाड़ी के पास बने दो मकानों को तोड़ता हुआ आसपास के घरों में घुस गया।
अफरातफरी के बीच ग्रामीण घर छोड़कर सुरक्षित स्थान की ओर भागे। सुबह ग्रामीणों ने किसी तरह प्रशासन को घटना की सूचना दी। थराली के तहसीलदार माणिक लाल भेंतवाल ने बताया नायब तहसीलदार के नेतृत्व में एक टीम झलिया गांव भेजी गई है। हालांकि गांव पहुंचने के लिए टीम को सात किलोमीटर पैदल चलना होगा जबकि भूस्खलन से रास्ता बंद भी है ऐसे मे टीम को ज्यादा वक्त भी लग सकता है

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