प्रदेश के किसानों को त्रिवेंद्र सरकार जल्द देगी बड़ी सौगात, हर महीने मिलेंगे इतने रुपये

देहरादून। उत्तराखंड कि त्रिवेंद्र सरकार जल्द ही प्रदेश के किसानों का 1500 रूपये मानदेय की सौगात देने जा रही जी हां मंडी परिषद के द्धारा किसानों को ये मानदेय दिया जाएगां। मंडी परिषद की बोर्ड बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव आएगा जिसके बाद प्रस्ताव पास होने के बाद किसानों को 1500 मासिक मानदेय मिलने को हरी मिल जाएंगी।

बता दें कि मंडी परिषद के अध्यक्ष गजराज बिष्ट के प्रस्ताव पर सरकार ने हामी भर दी है। बस प्रस्ताव को मंड़ी परिषद की बोर्ड बैठक से पास होना है। फोन पर हुई बातचीत में गजराज बिष्ट ने प्रस्ताव को लेकर कहा है कि अगली बोर्ड में प्रस्ताव पर मुहर लग जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से प्रस्ताव पर चर्चा की है जिस पर मुख्यमंत्री ने भी प्रस्ताव की सरहाना करते हुए हामी भर दी है। 1500 रूपये का मासिक मानदेय उन किसानों को तब तक दिया जाएगा जब तक किसानों की फसलें मंडी तक नहीं पहुंचती है। यानी कोई किसान खेती करने के लिए कोेई बगीचा तैयार करता है और 3 साल तक उसे बगीचे से किसान को कोई आय नहीं मिलती है, क्योंकि बगीचे में तीन साल पेड़ तैयार करने में लग जांएगे लेकिन जैसे ही तीन साल बाद बगीचे से फल तैयार करने से आय प्राप्त हो जाएगी तो किसान को आय मिलना शुरू हो जाएगा लेकिन जो तीन साल का समय होगा जिसमें किसान को कोई आय प्राप्त नहीं होगी…उस तीन साल के दौरान मंडी परिषद हर माह किसान को 1500 रूपये मानदेय देगा।

योजना के पीछे पहाड़ों से पलायन को रोकना

इस योजना के पीछे पहाड़ों से पलायन को भी रोकना है क्योंकि उत्तराखंड कि जो युवा 7 से 10 हजार के लिए घर छोड़कर रोजगार के लिए पलायन कर जाते हैं और महीने की बचत उन युवाओं की 1000 से 1500 रूपये ही होती है। इसलिए अगर वह ऐसे युवाओं को 1500 रूपये कुछ साल के लिए मानदेय दिया जो घर से बाहर रहते हैं तो उससे युवा जहां कृषि करने के लिए प्रेरित होंगे, वहीं कुछ साल बाद वह उसी खेती से खुद इतने स्वाबिलम्बी बन जाएंगे कि उनकी आर्थिक स्थिति खुद सुधर जाएगी और वह स्वरोजगार के लिए प्रेरित करेंगे।

पलायल पर रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी-सीएम

प्रदेश के किसानों को खेती के लिए प्रेरित करने को लेकर मंड़ी परिषद के अध्यक्ष के प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री का कहना कि इससे पलायल पर रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी। साथ ही ऐसे युवा खेती के प्रति प्रेरित होंगे जो पलायन कर चुके हैं। 1500 रूपये कोई वेतन नहीं है लेकिन खेती करने में किसानों को जो शुरूवाती दिक्कतें होती है, वह इस मानदेय के जरिए दूर हो जाएगी है। वहीं कृषि मंत्री सुबोध उनियाल का कहना कि किसानों की मदद करने के उदेश्य से ये प्रयास किया गया है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।

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