ब्रिटिश काल से पूर्व में बसे गांव के लोगों के साथ छलावा, विधायक बोले- अच्छे दिन आएंगे

हल्द्वानी(योगेश शर्मा) : देश को आजाद हुए 70 साल और उत्तराखंड राज्य को बने 18 साल का समय पूरा हो गया हैं बावजूद इसके नैनीताल जिले के हल्द्वानी तहसील का एक गांव ऐसा भी है जो राष्ट्रीय राजमार्ग से महज 7 किलोमीटर दूर है लेकिन आज भी वो गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है, ब्रिटिश काल में बसें इस गांव के लोगों को हर सरकार ने छला है, सड़क और पुल के लिए कैसे आज भी इस गांव के लोग संघर्ष कर रहे हैं.

ब्रिटिश काल से पूर्व में बसा विजयपुर गांव आज भी न तो सड़क मार्ग से जुड़ पाया

आज देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ आज भी कई ऐसे गांव हैं जो मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। उत्तराखंड के नैनीताल जिले की लालकुआं विधानसभा में ब्रिटिश काल से पूर्व में बसा विजयपुर गांव आज भी न तो सड़क मार्ग से जुड़ पाया है और ना ही आज तक कोई सरकार यहां पुल बना पाई है। विजयपुर हल्द्वानी क्षेत्र का सबसे पुराना गांव है, कहा जाता है कि राजा विजय चंद्र के नाम से इस गांव का नाम विजयपुर रखा गया। लेकिन आजादी के 70 साल पूरे होने के बावजूद भी इस गांव में आज तक सड़क और पुल नहीं बन पाया, जब उत्तराखंड राज्य बना तो विजयपुर के ग्रामीणों की आस जगी की अब उनके गांव के भी दिन बहुरंगे, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर और फल पट्टी क्षेत्र से परिपूर्ण विजयपुर गांव में किसी भी सरकार ने नजर नहीं डाली.

यहां बड़े पैमाने पर टमाटर, आलू, अदरक सहित कई फल और सब्जियां की भारी मात्रा में पैदावार होती

जलवायु परिवर्तन और भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार विजयपुर गांव में बड़े पैमाने पर टमाटर, आलू, अदरक, हल्दी, मिर्च सहित कई फल और सब्जियां की भारी मात्रा में पैदावार होती है, लेकिन उन सभी फल सब्जियों को मण्डी पहुंचाने के लिए न तो इस गांव के लोगों के लिए सड़क बनी है और ना ही गांव और सड़क के बीच में सूखी नदी में कोई पुल बन पाया है, लिहाजा बरसातों में यहां की फल सब्जी मंडी तक न पहुँचने से घर में ही सड़ जाती है और बच्चे भी स्कूल जाने से वंचित हो जाते हैं क्योंकि सूखी नदी के उफान में आने के बाद विजयपुर गांव का संपर्क शहर से टूट जाता है, सालों से चली आ रही इस मुसीबत को अब यहां के ग्रामीणों ने अपनी किस्मत समझ लिया है, लेकिन सरकार और प्रशासन ने कभी उनकी सुध लेने की कोई कोशिश नहीं की. ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं को सिर्फ चुनाव में ही उनकी याद आती है और वह वोट देने के लुभावने वादे कर यहां से चले जाते हैं और फिर अगले 5 साल बाद आते हैं, प्रशासनिक अधिकारियों के कई बार चक्कर लगाकर भी ग्रामीण अब थक चुके है लेकिन अधिकारी भी इस गांव की तरफ कोई ध्यान नहीं देते।

जब इस गांव की दास्तान कुमाऊं कमिश्नर राजीव रौतेला को बताई गयी तो उन्होंने पूर्व के अधिकारियों की तरह आश्वासन देते हुए कहा की वो जल्द ही उस गांव की सुध लेकर इस समस्या का हल करने का प्रयास करेंगे.

इस गांव के भी अच्छे दिन आएंगे

जब क्षेत्रीय विधायक नवीन दुम्का से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा की ये मामला उनके संज्ञान में है और जल्द ही इस गांव के भी अच्छे दिन आएंगे, उनके द्वारा विजयपुर गांव में सड़क और पुल निर्माण के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है, हालांकि विधायक जी अब भी ये नहीं बता पा रहे है की गांव में सड़क और पुल कब बनेगा।

डबल इंजन की त्रिवेंद्र सरकार और गांव को सड़कों से जोड़ने की केंद्र सरकार की मुहिम के बावजूद भी अगर प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण विजयपुर गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तो यह समझा जा सकता है कि सरकार के दावों की हकीकत क्या है बहरहाल आज भी विजयपुर गांव को सड़क और पुल का इंतजार है अब देखना है कि क्या राज्य की डबल इंजन सरकार और केंद्र की मोदी सरकार इस गांव की सुध लेगी या विजयपुर गांव के लोगों को अपनी किस्मत के सहारे जिंदगी भर इन सुविधाओं से वंचित ही रहना पड़ेगा।

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