उत्तराखंड : मासूम बच्चों को शायद पता भी नहीं कि उसके पिता देश के लिए क्या थे और कहां चले गए

हल्द्वानी : जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा सेक्टर में पेट्रोलियम के दौरान खाई में गिर कर शहीद हो गए सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरु का पार्थिव शरीर हल्द्वानी के अर्जुनपुर स्थित उनके घर पहुंचा। माहौल गमगीन था। शहीद पति का पार्थिव शरीर देख पत्नी बेसुध हो गई तो वहीं शहादत की खबर सुनने के बाद से भाई की आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आज शहीद का पार्थिव शरीर हल्द्वानी स्थित घर लाया गया तो स्थानीय लोग और गांव वालों ने शहीद सूबेदार यमुना प्रसाद के इस बलिदान के लिए उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी और साथ ही जब तक सूरज चांद रहेगा यमुना प्रसाद पनेरु तेरा नाम रहेगा के नारे लगाए।

जबरदस्त पर्वतारोही भी थे यमुना पनेरु, सम्मानित किए गए थे

मूलरूप से ओखलकांडा के पदमपुर मीडार निवासी यमुना प्रसाद पनेरु कुमाऊँ रेजिमेंट में तैनात थे।यमुना प्रसाद 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। इसके बाद से वो सेना के साहसिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहे। साल 2012 में वो दौर भी आया जब यमुना प्रसाद ने साबित किया कि वो एक जबरदस्त पर्वतारोही भी हैं। 2012 में उन्होंने माउंट एवरेस्ट चोटी को फतह करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया था। इसके लिए उन्हेंं उनकी टीम के साथ सम्मानित भी किया गया था। 12 जून को देर रात कुपवाड़ा में अपनी टीम का रेस्क्यू करने के लिए बर्फ से ढकी चोटियों पर थे जहाँ आतंकी मुठभेड़ में उनकी शहादत हो गयी।

मासूम बेटा अंजाम, मां जरुर सुनाएगी पिता के बहादुरी के किस्से

वहीं आज चित्रशिला घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। भाई पिता समेत बेटे ने मुखाग्नि दी। इस दौरान शहीद का बेटा घाट के पास बैठा रहा और ऐसा लगा कि शायद उसे पता भी नहीं कि हो क्य रहा है। उसे लोगों की भीड़ दिखी, ताऊ-चाचा रोते दिखे, मां बिलखती दिखी औऱ सेना की वर्दी में अधिकारी सैनिक दिखे लेकिन वो शायद जान नहीं पाया की आखिर हो क्या रहा है। ताबूत में कौन लेटा है उसका अंदाजा शायद उसे हो। बेटा निष्फिक्र होकर बैठा रहा। शायद उसे ये पता नहीं कि उसके पिता देश के लिए क्या थे और क्या करके गए औऱ कहां गए। लेकिन जरुर मां मासूम बेटे को पिता के बहादुरी के किस्से सुनाएगी जिसे बेटा अमल में लाएगा और पिता की तरह बहादुरी भरा काम करेगा।

शहीद का 7 साल का बेटा और छोटी बेटी

बता दें कि शहीद का 7 साल का बेटा है और एक छोटी बेटी साक्षी है जो की पिता की शहादत से अनजान हैं. वो लोगों की भीड़ तो देख रहे हैं और समझ नहीं पा रहे कि आखिर हुआ क्या है। मां, चाचा, दादी और लोग सब रो क्यों रहे हैं। हम शहीद को सलाम करते हैं और परिवार के प्रति सांत्वना व्यक्त करते हैं। और सरकार से अपील करते हैं कि शहीद के परिवारों का खास तौर पर ध्यान रखा जाए क्योंकि एक बेटा,एक पिता, एक पति, एक भाई जो देश के लिए कर जाता है वो बहुत ही कर कर पाते हैं और अमिट छाप छोड़ जाते हैं।ऐसे में सरकार को शहीदों के परिवार को नहीं भूलना चाहिए।

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