हाईकार्ट ने सुनी डाक्टरों की फरियाद,सरकार को दिया 24 घंटे का वक्त

high court

ब्यूरो- पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में यू तो कई यक्ष प्रश्न हैं जिनका उत्तर सरकार देने का साहस अब तक की सरकारें नहीं जुटा पाई हैं। उनमें से एक पहाड़ी इलाको में अपने हाल पर रोता सेहत का सवाल भी है। 17 साल बाद भी सूबे कई पहाड़ी इलाके आज भी दुर्गम बने हुए हैं।

लिहाजा इन इलाको में सरकारी पगार पाने वाले ज्यादातर ऐसे मुलाजिम हैं वे या तो वहां अपनी ड्यूटी पूरी मुस्तैदी के साथ नहीं बजा रहे हैं और जो बजा रहे हैं उनके मुताबिक वो सराकर और अवाम दोनों पर बड़ा एहसान कर रहे हैं। अपने पक्ष में एसे सरकारी मुलाजिम कई तर्क भी रखते हैं।

बहरहाल सूबे के दुर्गम इलाकों में सेवा देने वाले डॉक्टरों को नियमानुकूल भत्ता नहीं मिल रहा था। लेकिन हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति के.एम.जोसफ और न्यायमूर्ति वी.के बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ ने राज्य सरकार को उसके फर्ज की याद दिलाते हुए 24 घंटे के भीतर भत्ता देने को कहा है।

गौरतलब है कि MCI के प्रावधान के मुताबिक किसी भी प्रदेश मे दूरस्थ क्षेत्रों मे काम करने वाले चिकित्सकों को विशेष भत्ता दिया जाता है। तय है कि अब सरकार को माननीय हाईकोर्ट के फैसलों पर अमल करना होगा और प्रावधान के मुताबिक चिकित्सकों को भुगतान करना होगा।

यानि इससे जहां सरकार की झोली मे असर पड़ेगा वहीं दूरस्थ तैनाती वाले डाक्टरों की आय मे इजाफा होगा। सरकार को चिकित्सकों की सेवा के हिसाब से ही पगार का 10 से 30 फीसदी तक ज्यादा भुगतान करना होगा। हालाकिं ये उन डाक्टरों का वाजिब हक है जो दूर दराज के इलाकों में मरीजों के लिए भगवान साबित हो रहे हैं।

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