बकरियों ने चुना अपना वर, लगी मेहंदी और हिंदू रिति-रिवाज की तरह लिए सात फेरे

टिहरी- आपने अभी तक लड़के और लड़कियों का ही स्वयंवर देखा होगा लेकिन टिहरी जिले में पड़ने वाले धनौल्टी के जौनपुर विकास खंड स्थित पन्तवाडी गांव ग्रीन पीपुल दी संस्था ने दूसरी बार बकरियों की नस्ल में सुधारीकरण की दृष्टी से बकरे-बकरियों के स्वयंवर का आयोजन किया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप मे गढ़वाली लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी पहुंचे.

दो मंत्रियों के बीच खींचतान, ग्रीन पीपुल संस्था ने संभाली इसकी बागडोर

बता दे पिछले साल भी इसी संस्था ने इसी गांव में बकरे-बकरियों का स्वंयवर का आयोजन किया था। और इस साल भी सरकारी स्तर पर बकरियों का स्वयंवर करवाने की बात चल रही थी किन्तु सरकार में ही बकरी के स्वयंवर को लेकर दो मंत्रियों मे खिंचतान शुरु हो गई. जिसके बाद इस स्वयंवर को रद्द किया गया था लेकिन ग्रीन पीपुल संस्था ने इसकी बागडोर संभालते हुए दूसरी बार बकरियो के पालन नस्ल सुधार को लेकर बकरी स्वयंवर का आयोजन किया.

ग्रीन पिपुल संस्था बकरियों और भेड़ों की नस्ल सुधारने के मकसद से यह आयोजन किया. खास बात ये रही कि इस संस्था को बकरी और भेड़ पालकों का जबरदस्त रिस्पांस मिल रहा है। यही वजह है कि देश भर से लोग यहां पहुंचे. पंतवाड़ी गांव को इस संस्था ने ‘the goat village’ के तौर पर विकसित किया है। यहां बेहतर नस्ल की बकरियां और भेड़ों का पालन हो रहा है।

गोल घेरा कर बकरें व बकरियों को छोड़ा गया 

इस बकरी स्वंयबर मे कई किस्म की नस्ल के बकरें व बकरियों को एक जगह पर छोड़ा गया और अपनी पसन्द के बाद बकरियों का विवाह करवाया गया. तीन बकरियों ने 12 बकरों में से स्वयं अपना वर चुना। तीनों बकरियों का अलग-अलग स्वयंवर हुआ, जिसमें हर स्वयंवर के लिए 5 बकरों में एक बकरी को छोड़ा गया।

लगी मेहंदी, बकरा-बकरी ने लिए सात फेरे

आपको बता दें ये विवाह हिन्दू रिति रिवाज से किया गया जिसमें बकरा और बकरी ने सात फेरे लिये। जिसके बाद आये मेहमानों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। जहां पर उनका स्वागत पारंपरिक वाध्य यंत्रों के साथ आर्मी बैंड की धून के साथ किया गया। बकरी स्वयंवर पूरे विधि विधान और रीति रिवाजों के साथ किया गया। शादी से पहले बाकायदा बकरियों को हल्दी लगायी गई, मंगल गीत हुए और तीनों बकरियों का कन्यादान भी हुआ।

रीति रिवाज से हुई शादी

बकरी स्वयंवर में बाराती, घराती से लेकर पंडित सब मौजूद थे। पूरे रीति-रिवाज से तीनों बकरियों का स्वयंवर हुआ। स्वयंवर में मेंहदी, हल्दी, तिलक और विदाई की रस्में भी निभाई गई।

पूरा समारोह ‘ग्रीन पीपुल संस्था’ की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं की नस्ल सुधारने के लिए आयोजित किया गया। वहीं आसपास के ग्रामीण सैकड़ों की तदाद में वर और वधु पक्ष एक साथ स्वयंवर समारोह में मिले और पारंपरिक गीतों पर जमकर नृत्य किया।

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