
देहरादून: उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार ने हर वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर उनके लिए योजनाएं बनाई हैं। सैनिक बाहुल्य राज्य होने के कारण राज्य में सैनिकों, पूर्व सैनिकों और सैनिक आश्रितों की संख्या भी बहुत अधिक है। ऐसे में त्रिवेंद्र सरकार ने सैनिक और उनके परिवारों के कल्याण के लिए कई योजनाएं संचालित की हैं। जहां सरकार ने सैनिकों के बच्चों के कोचिंग से लेकर रोजगार तक के द्वार खेले हैं। वहीं, शहीद सैनिकों के सम्मान और उनके परिवारों की देखभाल की भी जिम्मेदारी ली है।
उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार रोजगार मुहैया कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। राज्य में उपनल के जरिए त्रिवेंद्र सरकार ने पूर्व सैनिक और शहीदों के परिवारों को रोजगार देने में सफलता हासिल की है। सैनिक कल्याण योजना के तहत त्रिवेंद्र सरकार पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों की आर्थिक सहायता, पेंशन से संबंधित समस्या का निस्तारण और उनकी अन्य मांगों को प्राथमिकता से हल करती है।
उत्तराखंड राज्य देवभूमि के साथ वीरभूमि के नाम से भी जाना जाता है। भारतीय सेना में उत्तराखंड के जवान बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं और देश की रक्षा के लिए हमेश तैयार रहते हैं। देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के परिवारों की जिम्मेदारी को सरकार निभा रही है। उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सरकार उपनल के जरिए पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के एक सदस्य को रोजगार दे रही है। शहीद सैनिकों के परिवारों के एक सदस्य को भी सरकारी नौकरी दी जा रही है। सैनिक कल्याण विभाग की ओर से पूर्व सैनिकों के परिवारों की मदद और शहीद के परिवार कों आर्थिक सहायता दी जा रही है। पूर्व सैनिकों की बेटी की शादी या फिर पढ़ाई। सरकार उनकी मदद करती है।
देहरादून में त्रिवेंद्र सरकार सैन्य धाम का निर्माण कराने जा रही है। इस सैन्य धाम में सेना से जुड़ी स्मृतियों को संजोया जाएगा। उत्तराखंड के रणबांकुरों की कहानियों से लेकर सैनिकों से चीजों को रखा जाएगा। 1947 के बाद देश रक्षा में कुर्बानी देने वाले हर सैनिक का नाम सैन्य धाम में स्वर्ण अक्षर में लिखा जाए प्रदेश में चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद यह पांचवे धाम के रूप में पूजा जाएगा। वहीं, त्रिवेंद्र सरकार ने थलीसैंण पौड़ी गढ़वाल और उखीमठ रूद्रप्रयाग में सैनिक विश्राम गृह का निर्माण कराया है। जहां पर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए ठहरने की व्यवस्थाएं की गई हैं।
इतना ही नहीं उपनल के जरिए पूर्व सैनिकों के आश्रितों को एनडीए, आईएमए, एयर फोर्स अकादमी, सिविल सेवा जैसी कोचिंग के लिए भी आर्थिक सहायता की जा रही है। साथ ही अगर किसी का राष्ट्रीय या अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में चयन होता है या प्रतिभाग करते हैं तो प्रोत्साहन अनुदान भी दिया जाता है। दूसरे विश्व युद्ध के योद्धाओं को भी अब हर तीसरे महीने में पेंशन मिल रही है।a