रंग लाई सीएम त्रिवेंद्र रावत की पहल, महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

हरिद्वार(नरेश तोमर)- स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने एक अनोखी पहल की है। राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों में अब सरकार स्थानीय उत्पादों से निर्मित प्रसाद को प्रोत्साहित करेगी। इसके लिए देवभोग नाम से एक ब्रांड तैयार ​कर लिया गया है जिसमे बद्रीनाथ धाम में देवभोग प्रसाद की अच्छी बिक्री के बाद हरिद्वार के प्रसिद्ध मंदिरो में भी अब ये प्रसाद बेचा जायगा ​80 लाख तीर्थयात्रियों तक इस प्रसाद की पहुंच बनाने का लक्ष्य

संस्था वॉइस हैस्को टेक्नीकी​ के मास्टर ट्रेनर ​गोविन्द महर ने बताया की इस साल 80 लाख तीर्थयात्रियों तक इस प्रसाद की पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि यह शुद्ध देशी घी के साथ-साथ राज्य में उतपन्न जैविक खेती ड्राई फ्रूट से बनने वाला अदभुद प्रसाद होगा.

बद्रीनाथ में प्रतिमाह एक लाख रुपये की प्रतिदिन बिक्री

​मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की पहल से बद्रीनाथ में प्रतिमाह एक लाख रुपये की प्रतिदिन बिक्री के बाद हरिद्वार की हरकी पौड़ी, मनसा देवी मंदिर और चंडी देवी मंदिर में भी इस प्रसाद की दुकान लगाई जाएगी इसके अलावा, महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। राज्य में कुल 625 साइन (मंदिर या तीर्थस्थान) हैं। इनमें प्रत्येक में देवभोग नाम का यह प्रसाद उपलब्ध कराया जाएगा।

स्थानीय उत्पाद मंडुवे, कुट्टू और चौलाई से प्रसाद तैयार

इसका निर्माण स्थानीय स्वयं सहायता समूह करेंगे और बिक्री के लिए संबंधित मंदिर के नजदीक निशुल्क स्थान की उपलब्धता सरकार के स्तर से सुनिश्चित कराई जाएगी। महिला स्वयं सहायता समूहों ​द्वारा ​स्थानीय उत्पाद मंडुवे, कुट्टू और चौलाई से प्रसाद तैयार किया​ जायगा ​। बांस और रिंगाल से बनी टोकरियों में इसकी पैकेजिंग ​की जायगी. वहीं ​10-10 महिलाओं के समूहों  ​द्वारा ​ऑर्गेनिक प्रसाद ​अब हरिद्वार के मंदिरो में ​बेचा​ जायगा. मुख्यमंत्री की इस पहल को हरिद्वार के प्रसिद्ध मंदिरों तक पहुंचाया जायगा.

महिलाओं में खुशी का माहौल

महिला समूहों को ​घर बैठे​ ​रोजगार मिलने से हरिद्वार की महिलाओं में खुशी का माहौल है. महिलाओं का कहना है की इस रोजगार से अब हम घर पर से ही प्रसाद तैयार कर अपने घर का भी ख्याल रख सकते हैं और रोजगार से आमदनी भी कमा रहे हैं.

प्रसाद से ​मिलने वाली ​आधी राशि मुनाफे में तब्दील हो​कर महिला विकास में जहां अहम कदम शामिल होगी वहीं इससे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वहीं ​देवभूमि में आने वाले श्रद्धालुओं को यहां की मिटटी की सुगन्ध भी मिलेगी.

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