सेना का वीर जवान जिसे शव गृह भेजने का दिया गया था आदेश, बने भारत के पहले ‘ब्लेड-रनर’

हमारे देश के वीर जवान सैनिक ऐसे ही वीर और बहादुर नहीं कहलाते…कुछ तो बात है हमारी वीर सैनिकों के अंदर कि हस्ती मिटती नहीं उनकी…जी हां हमने अक्सर देखा या सुना है कि जब इंसान का एक पैर, हाथ या कोई भी अंग काम न कर सके तो हम अपनी जिंदगी से भी हार जाते हैं औऱ जिंदगी भर कोसते हैं. लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि एक वीर सैनिक जिसे शव गृह भेजने के आदेश जारी कर दिए गए थे और आज वो पूरी दुनिया में छाया हुआ है.

मेजर के लिए देवदूत बना डॉक्टर, काटनी पड़ी थी एक टांग, हैरानी वाली बात ये…

जी हां हम बात कर रहे हैं कारगिल युद्ध के हीरो मेजर डीपी सिंह की. 1999 के कारगिर युद्ध के दौरान मेजर डीपी सिंह घायल हो गए थे औऱ उनकी शरीर की स्तिथि ऐसी हो गई थी कि उन्हें मरा हुआ समझ लिया गया था और उनके शरीर को शव गृह में भेजने का आदेश दे दिया गया था. लेकिन फिर एक डॉक्टर मेजर के लिए देवदूत बनकर आया और अस्पताल लेजा कर मेजर डीपी सिंह का इलाज किया. वहीं इस दौरान उनको बचाने के लिए उनकी एक टांग काटनी पड़ी. और इससे भी ज्यादा हैरानी वाली बात ये है कि वो अब एक धावक है. उनको कृत्रिम टांग लगाई गई है.

मेजर को कहा जाता है भारत का पहला ‘ब्लेड-रनर’ 

औऱ आप देख सकते हैं वो कैसे कैसे कमाल कर रहे हैं. उन्होंने कसरत करते हुए एक वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है जो की काबिले तारीफ है… आज उन्हें भारत का पहला ‘ब्लेड-रनर’ कहा जाता है.

भले ही ज़मी पे गिरा तू पडा हो,
भले ही कदम से कदम ना मिला हो,
भले लडखडाके समंभलना पडा हो,
भले हान्थो के बल ही चलना पडा हो

तू बडना ना छोड
आगे बडना ना छोड

जीत हर हाल मे तेरी ही होगी

jai hind

कविता continues……… rest of it I will share later.. 🙏😊

— Major D P Singh (@MajDPSingh) March 10, 2019

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