टिहरी : भारतीय नौसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर लौटे गांव, बच्चों के लिए खोला स्कूल, हो रही तारीफ

टिहरी गढ़वाल : टिहरी जिले के बेलेश्वर गाँव में स्थित केराराम स्कूल में बच्चों को शहरी बच्चों के तहर शिक्षा दी जाने की कोशिश की जा रही है और ये कोशिश कर रहे हैं भारतीय नौसेना से VRS लेकर गांव लौटे हर्षमणि उनियाल और प्राइवेट नौकरी कर रहे उनके छोटे भाई सूर्यमणि उनियाल. जो गांव के बच्चों को शहर के बच्चों की तरह शिक्षा देने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

7 दिवसीय रीडरशिप डेवलपमेंट कार्यक्रम का समापन

जी हां केराराम स्कूल बेलेश्वर में ऊना-एसआईएफ द्वारा संचालित 7 दिवसीय रीडरशिप डेवलपमेंट कार्यक्रम का समापन हुआ। ऊना एसआईएफ द्वारा उत्तराखंड के 3 स्थानों पर रीडरशिप डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत कैम्प का आयोजन किया जा रहा है जिसमे केराराम स्कूल बेलेश्वर, हिमालयन स्कूल घनसाली तथा परांधा स्कूल यमकेश्वर ब्लॉक आदि हैं। केराराम स्कूल बेलेश्वर में कैम्प कार्यक्रम के समापन पर बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति, नाट्य के माध्यम से दिए गए कई सामाजिक जन जागृति के संदेश दिया गया।

बच्चों को दी गई प्रैक्टिकल तौर पर जानकारियां

आपको बता दें कि एक सप्ताह के इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को कई महत्वपूर्ण जानकारियों से प्रैक्टिकल क्रियाकलाप के द्वारा जानकारी दी गयी। साथ ही रोजाना योगा का 15 मिनट का प्रशिक्षिण कार्यक्रम का एक हिस्सा रहा। केराराम स्कूल के सभी बच्चों कार्यक्रम के तहत समूह बनाकर जानकारी दी गयी, जिसका मुख्य कारण समूह में रहकर एक साथ कैसे पढ़ा जाए, सीखा जाए एवं आगे बढा जाए।

पहाड़ी जिलों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के बीच के शिक्षा के अंतर को कम करना

इस कार्यक्रम का खास उद्देश्य खास तौर पर पहाड़ी जिलों के गांव के स्कूलों पढ़ रहे बच्चों के बीच के शिक्षा के अंतर को कम करना है। स्वच्छ भारत मिशन एवं सबको शिक्षा को जोड़ने के लिए गांव में शैक्षिक भ्रमण रैली निकाली। शहर की जिंदगी एवं शिक्षा व्यवस्था को स्मार्ट क्लास के माध्यम से वीडियो मूवी के तहत दिखाने की कोशिश की गई। खेल-खेल के माध्यम से बच्चों में शिक्षा के प्रति लगाव पैदा करने की कोशिश भी की गयी और इसके साथ ही गणित जैसे जटिल विषय को खेल के माध्यम से सिखाने का प्रयास स्वयंसेवियों के माध्यम से बेहतर तरीके से करने की कोशिश की गई।

अभिभावकों को दिया गया संदेश

वहीं आज कार्यक्रम के समापन के मौके पर बच्चों को नशा एवं अन्य तरह के कुरीतियों से बचाने का अभिभावकों को नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया। बच्चों में पढ़ने एवं लिखने की आदत विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने, बुरी आदतों-बुरी बातों से कैसे बचा जाय जैसे मुद्दों पर कार्यक्रम कराए गए। इस पूरे कार्यक्रम को ऊना के 8 स्वयंसेवियों के निर्देशन में समपन्न किया गया जिसमे 4 लड़कियां और 4 लड़के शामिल रहे।

घनसाली का केराराम स्कूल, बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए कर रहा उम्दा कार्य

आपको बता दें कि घनसाली का केराराम स्कूल केमर घाटी के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उम्दा कार्य कर रहा है जिसमे बच्चे का हर तरह का विकास हो सके। स्वयसेवियों द्वारा स्कूली बच्चों के साथ बेलेश्वर, श्रीकोट गाँव में शिक्षा एवं स्वच्छता जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया। इसके साथ साथ एक जंगल ट्रैकिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारत की विभिदता में एकता का संदेश बच्चों के माध्यम से देने की पूरी कोशिश की गई।

प्रसिद्ध जनकवि एवं अध्यापक बेलीराम कंसवाल, नरेंद्र सिंह नेगी ‘गुंजन’ एवं रमोला द्वारा उत्तराखंड की सुंदरता, देश की बेटियों को शिक्षित एवं मजबूती से मिले समानता का अधिकार पर कविता मंचन किया गया। वहीं अध्यापक आर बी सिंह, महासचिव भिलंगना, नशा मुक्ति अभियान ने सभी से नशे से दूर रहने की अपील की।

केराराम स्कूल के प्रबंधन एवं बच्चों की भूरी भूरी प्रशंसा की गई

आपको बता दें कि केराराम स्कूल बेलेश्वर के कुशल प्रबंधन द्वारा हर तरह का सफल कार्यक्रम पहाड़ के बच्चों के शैक्षिक एवं सामाजिक विकास के लिए किया जा रहा है। ऊना के स्वयंसेवियों द्वारा केराराम स्कूल के प्रबंधन एवं बच्चों की भूरी भूरी प्रशंसा की गई और साथ ही केराराम सोसाइटी द्वारा संचालित केराराम स्कूल के हर संभव कोशिश को दिल से सराहा गया।

भारतीय नौसेना से स्वेच्छिक सेवानिवृति लेकर गांव वापस आये

जानकारी के लिए बता दें कि यह स्कूल डॉ सोना उनियाल के कुशल प्रबंधन एवं नवोदय से पढ़े दो भाई हर्षमनी और सूर्यमणि उनियाल का है. जिसमें हर्षमणि उनियाल जो कि भारतीय नौसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर गांव वापस आये और वह अपना जीवन अब पहाड़ के बच्चों को अच्छी शिक्षा देने में लगे हैं. इनकी कोशिश है कि गांव के बच्चों को भी शहर के बच्चों की तरह शिक्षा मिल सके। इनकी कोशिश से पलायन काफी हद तक रोका जा सकता है। क्यों लोग बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए भी पलायन कर रहे हैं लेकिन अगर बच्चों को गांव में ही अच्छी शिक्षा मिले तो एक बार के लिए पलायन न करने के लिए सोचा जा सकता है।

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