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उत्तराखंड : आज़ादी के 7 दशक बाद भी यहां के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर

टिहरी गढ़वाल : आज़ादी के 7 दशक गुजरने के बाद भी आज नगर पंचायत घनसाली-चमियाला के लोगह गंदा पानी पीने को मज़बूर है।

पानी जीवन का अभिन्न अंग है. इसके बिना इंसान का जीन मुमकिन नहीं है. खाने, पीने से लेकर नहाने, कपड़े धोने से लेकर घर के कई काम और दिनचर्या में पानी का प्रयोग किया जाता है. लेकिन जिस तरह के हालात नगर पंचायत चमियाला-घनसाली में है उससे साफ है कि ऐसे गंदे पानी पीने से लोग एक दिन गंभीर बिमारी की चपेट में आ जाएंगे. लेकिन लोग करें भी तो क्या करें.

प्रतिनिधियों का कार्य के प्रति कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं

घनसाली-चमियाल के हालातों को देखकर ये नहीं लगता कि इन नगरों के चुने हुए  जनप्रतिनिधियों अध्यक्ष और सभासदों को जनता के दर्द से कोई लेना देना और इसके लिए कोई कोशिश की. एक तरफ लोग पीने के पानी की साफ बूंद-बूंद के लिए कई दिनों से तरस रहे हैं तो वहीॆ नगर पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाव भाव देख कर ये नहीं लगता है कि उनके इस कार्य के प्रति भी कोई नैतिक जिम्मेदारी है।

साफ सफाई की व्यवस्था भी पटरी से उतरी

वहीं बात करें साफ-सफाई की तो नगर पंचायत चमियाला की साफ सफाई की व्यवस्था भी पटरी से उतर चुकी है। बेलेश्वर, श्रीकोट, भंडारी गांव, चमियाला बाजार तथा अन्य कई जगह पीने के शुद्ध पानी को लेकर संकट बना हुआ है। जल संस्थान घनसाली और चमियाला कार्यलय मात्र लोगों से जलकर उगाही कर इतिश्री कर रहे है। साफ पानी की सप्लाई पर अधिकारी पानी बन्द करने की बात कह देते हैं।

शो पीस बन कर रह गए करोड़ों रुपये के फिल्टर

घनसाली और चमियाला क्षेत्र के लिए पानी की सप्लाई के लिए बनाये गए करोड़ों रुपये के फिल्टर शो पीस बन कर रह गए हैं। लेकिन कोई इन फिल्टरों का संज्ञान लेने वाला तक नहीं है। आज जनता में आक्रोश पनप रहा है ऐसे में इन फिल्टरों के कार्यों की जांच करने की आवश्यकता है ताकि दोषियों से सरकारी धन के दुरुपयोग की उगाही जनता के हित के लिए की जा सके।

एक तरफ इन फिल्टरों पर जनता का पैसा लुटाया गया वहीं दूसरी तरफ अब जनता को गंदा पीने का पानी परोस कर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि जल संस्थान चमियाला के जूनियर इंजीनियर को लोगों की पानी से जुड़ी समस्या तक पता नहीं होती कि कहाँ क्या समस्या है।

साफ पानी की सप्लाई देने की जगह पानी बन्द करने की बात कह देते हैं

आखिर पता तो अभियंता साहब को तब चले जब वह क्षेत्र की समस्या का संज्ञान लेने जाए और लोगों से जानने की कोशिश करें अन्य बड़े अधिकारियों की तो बात ही छोड़ दो। लोग गंदा पानी पीने को मजबूर है. जल संस्थान के अधिकारी साफ पानी की सप्लाई देने की जगह पानी बन्द करने की बात कह देते हैं। उनका कहना है कि उनके पास और कोई विकल्प नहीं वह गंदे पानी की सप्लाई बंद कर सकते है।

खेती-सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला पानी पीने के पानी से साफ

खेती-सिंचाई के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला पानी भी जलसंस्थान द्वारा घरों में दिए जाने वाले पानी से कई गुना साफ है। लोगों से हर माह का किराया पूरा वसूला जाता है और अगर आपने देर कर दी तो उसकी बाकायदा पेनल्टी लगाई जाती है । ऐसे में सवाल उठता है कि जब पानी साफ ही नही दिया जा रहा तब किस पर पेनलटी लगाई जाएगी। सवाल यह है कि जिम्मेदार कौन। जलसंस्थान या नगर पंचायत?

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