पिता को खोने के बाद भी नहीं टूटा हौसला, सेना में अफसर बना टिहरी गढ़वाल का लाल

देहरादून : बीते दिन उत्तराखंड में देश की सेवा के लिए 325 जाबांज अफसर तैयार हुए और देश को समर्पित हुए। कोरोना के कहर के बीच गाइडलाइन के अनुसार पासिंग आउट परेड का आयोजन किया गया। जिसमे उत्तराखंड के 25 युवा शामिल थे इन्हीं में से एक थे नकरौंदा में रहने वाले नवीन भट्ट। जी हां मूल रुप से टिहरी निवासी नवीन ने सेना में अफसर बनकर प्रदेश समेत टिहरी का नाम रोशन किया। मां और भाई बहनों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा।मां की आंखें भर आई। नवीन के पिता स्वर्गीय रतनमणि भट्ट टीएचडीसी में कार्यरत थे। उनके देहांत के बाद परिवार का काफी मुश्किलें सहनी पड़ी। पिता को खोने के बाद भी नवीन ने और उनकी मां ने हार नहीं मानी।

आपको बता दें कि नवीन परिवार मूल रूप से मगरौं, टिहरी गढ़वाल के रहने वाले हैं लेकिन करीब 8 साल पहले परिवार दून आकर रहने लगे। नवीन की 10वीं तक पढ़ाई विन फील्ड एकेडमी और इंटर तक की पढ़ाई संत कबीर एकेडमी, हर्रावाला से हुई। इसके बाद उन्होंने सेना में जाने का फैसला लिया और अब वह अफसर बनकर देश की सेवा करेंगे।

आपको बता दें कि 13 दिसंबर को पीओपी में 395 सैन्य अधिकारी पास आउट हुए जिसमे 325 भारतीय और 9 मित्र देशों के 70 जैंटलमेंट कैडेट्स विदेशी थे। मित्र देशों में सबसे ज्यादा अफगानिस्तान के है 41 कैडेट्स शामिल रहे। बता दें कि भूटान के 17, तजाकिस्तान के 3 , मॉरीशस के 1 , नेपाल के 2 , मालदीप के 1 , वियतनाम के 3 , श्रीलंका 1 , म्यांमार का 1 कैडेट्स शामिल रहे। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी ने देश को अब तक 62 हजार से ज्यादा सैन्य अफसर दिए हैं। मित्र राष्टों के 2572 सैन्य अफसरों को आईएमए प्रशिक्षण दे चुका है। आईएमए 88 साल से सेना का पॉवर हाउस बना हुआ है।

परेड से पास आउट होने के बाद उत्तर प्रदेश के 50, हिमाचल के 10, उत्तराखंड के 25, दिल्ली के 13, हरियाणा के 45, गुजरात के 4, पश्चिम बंगाल के 6, तेलंगाना के 3, तमिलनाडु के 6, राजस्थान के 18, पंजाब के 15, उड़ीसा के 4, मिजोरम के 2, मणिपुर के 3, बिहार के 32, चंडीगढ़ के 4, असम के 6, झारखंड के 6, केरल के 15, कर्नाटक के 5, जम्मू कश्मीर के 11 कैडेट्स बनेंगे सेना में अधिकारी

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