टिहरी : यहां के लोग सालों से तरस रहे सड़क के लिए, चुनाव बहिष्कार का ऐलान

टिहरी गढ़वाल (हर्षमनी उनियाल) : घनसाली विदहंसभ के एक और गाँव जमोलना ग्राम पचायत के ग्रामीणों ने विगत 25 वर्षों से सड़क की मांग को शासन व प्रशासन द्वारा अनसुना कर उपेक्षा जनक रवैया अपनाने पर अब लोकतन्त्र के हथियार को अपनाने का निर्णय लेकर चुनाव वहिष्कार करने की ठानी है। 25 वर्ष पूर्व दो पट्टियों को जोड़ने वाली सड़क मेगाधार-भेटी-जमोलना-पोखार मोटर मार्ग से अभी तक ग्राम जमोलना और जंदरुवाली को नहीं जोड़े जाने से ग्रामीणों का शासन व प्रशासन से भरोशा उठ गया है.

वर्षो पुरानी गुरिल्ला संगठन की मान सम्मान की मांग को नाकारा-पूर्व प्रधान

गांव के पूर्व प्रधान और आरएसएस के पुराने कार्यकर्ता, एस एस बी प्रशिक्षित स्वयं सेवक संगठन के महामंत्री (93 वर्षीय) महेशानंद सेमवाल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह से सरकारों ने उनकी वर्षो पुरानी गुरिल्ला संगठन की मान सम्मान की मांग को नाकारा है उसी तरह से उनके गांव को सड़क से जोड़ने की मांग को नाकारा जा रहा है जो काफी चिंताजनक है।

ग्रामीण सड़क की मांग की उपेक्षा से आहत है.- प्रधान

प्रधान विनय लक्ष्मी सेमवाल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा की स्थानीय संसधानों को आर्थिकी से जोड़ने के लिए ग्राम पंचायत की भागीदारी से पहाड़ की जवानी व पहाड़ के पानी को पहाड़ के उपयोग के अवधारणा के साथ 2 मेगावॉट लघु जल विधुत परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया। लेकिन सड़क सुविधा न होने से ग्रमीणों को हर तरह की समस्या से जूझना पड़ रहा है. अब ग्रामीण सड़क की मांग की उपेक्षा से आहत है.

तब आंदोलकारियों ने राज्य नहीं तो चुनाव नहीं का नारा दिया था -सामाजिक कार्यकर्ता

सामाजिक कार्यकर्ता तेजराम सेमवाल ने बताया की जब राज्य निर्माण का आंदोलन चल रहा था तो तब आंदोलकारियों ने राज्य नहीं तो चुनाव नहीं का नारा दिया था. उस समय जमोलना के ग्रामीणों ने पूरे मुल्क के विरोध के बाबजूद लोकतंत्र की मर्यादा के लिए 3 किमी चढ़ाई चढ़ कर वोट किया था. राज्य बना, राज्य बनने के 18 साल बाद भी महज 5 किमी सड़क का निर्माण न होना यह साबित करता है कि सत्ता हुक्मरान किस मानसिकता से ग्रसित है.

चुनाव बहिष्कार का ऐलान

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के तत्कालीन भूतल परिवहन मंत्री मेजर जनरल भुवन चन्दर खंडूरी से लेकर अबतक के सभी मुख्यमंत्रियों से लेकर ग्रमीण लगातार उक्त सड़क के निर्माण को लेकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन सत्ता हुक्मरान बहरी हो रखे हैं. अब ग्रामीण लोकतन्त्र को बचाने व जनता को नकारने का खेल खेल रहे सत्ता हुक्मरानों के आँख व कान खोलने के लिए चुनाव बहिष्कार करने के लिए तैयार है. सामाजिक कार्यकर्ता तेजराम सेमवाल ने कहा कि वह पलायन को रोकने के लिए स्थानीय संसाधनों को आर्थिकी से जोड़ने के लिए उधमिता विकास की अलख जगाये हुए हैं लेकिन सत्ता हुक्मरानों के अविवेकपूर्ण रवैया से क्षुब्ध है.

बहिष्कार या नोटा क्या होगा विकल्प ।। बहिष्कार बना विक्ल

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