
पिथौरागढ़: खबर की हेडिंग पढ़कर आप चौंके होंगे, लेकिन बात सही और सच्ची है। इस राखी पर बहनें, भाई की कलाई पर रिंगाल से बनी राखियां ही बांधेगी। पिथौरागढ़ में उत्तरापथ संस्था, समाप्ती की कगार पर पहुंच चुके रिंगाल कारोबार को फिर से जीवित करने की मुहिम चला रहे हैं। उनका प्रयास केवल मुहिम नहीं है, रोजगार का जरिया भी बन चुका है।
उत्तरापथ संस्था रिंगाल से बनी राखियां बाजार में बिक्री के लिए उतारेगी। मुनस्यारी के जैंती गांव में 25 महिलाएं राखी बनाने के काम में जुटी हैं। संस्था रिंगाल से केवल राखियां ही नहीं बना रही। बल्कि, 10-15 तरह की चीजें बनाई जार रही हैं।
संस्था ने घर को सजाने के लिए भी सामग्री बनाई गई है। घर में सामान रखने के लिए भी टोरियों समेत अन्य जरूरी सामान तैयार किया है। इसके अलाव रिंगाल से बने घोसले और कई तरह के झूमर भी तैयार किए गए हैं। ये देखने में तो बेहद खूबसूरत हैं ही। साथ ही पर्यावरण को संरक्षित करने में भी मददगार हैं।
