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नेपाल की लड़की से शादी भारी!, उत्तराखंड SIR में नहीं मिलेगा वोटिंग का हक?

भारत और नेपाल में यूं तो रोटी बेटी का रिश्ता रहा है लेकिन अब शायद भारत में बहु बनकर आई नेपाल की कई बेटियों पर SIR नई मुसिबत बनकर आया है। भारत में आधार कार्ड होने के बाद भी नेपाल की इन बेटियों को कई मुसिबतों का सामना करना पड़ रहा है। अब सवाल ये भी है कि क्या नेपाल की ये बेटियां भारत में वोट दे पाएंगी?

नेपाल से शादी कर भारत आई बेटियों के लिए SIR बना मुसिबत

उत्तराखंड में आठ जून से SIR यानी कि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होने जा रहा है। इसका सीधा असर उत्तराखंड में भारत में रह रही नेपाल की बेटियों पर पड़ने वाला है। SIR ने कहीं ना कहीं शादी करके नेपाल से भारत आई हजारों महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है। सालों से भारत में शादी करके अपना घर बसा कर परिवार संभाल रही महिलाएं जिनके पास भारत के आधार कार्ड भी हैं, वो चुनावों में अपना मतदान ही नहीं कर सकती हैं।

चुनाव से पहले SIR की प्रक्रिया तेज

दरअसल SIR के दौरान बीएओ घर-घर जाकर जानकारी की जांच करते हैं। इसमें देखा जाता है कि कौन सा व्यक्ति उस इलाके में रहता है और वोट देने लायक है। जिन लोगों की मृत्यु हो जाती है या वो दूसरी जगह चले जाते हैं या जिनके पास भारत की नागरिकता नहीं होती और जिनके नाम गलत तरीके से वोटर लिस्ट में शामिल किए होते हैं। उन सभी के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाते हैं। इस दौरान लोगों को वोटर लिस्ट को लेकर दावा करने और आपत्ति दर्ज कराने का भी मौका दिया जाता है।

क्या नेपाल से आई बहुओं का वोटिंग हक छिन जाएगा?

जब से सब कुछ सॉल्व हो जाता है उसके बाद फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाती है। तो अब जिन नेपाली मूल की महिलाओं ने नागरिकता लिए बिना वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज करया होगा अब उनके नाम हटाए जा सकते हैं। नेपाल और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों के बीच सदियों से रोटी बेटी का संबंध रहा है। सालों से नेपाल की कई लड़कियां भारतीय लड़कों से शादी करके भारत आती हैं। मोटा मोटी अनुमान लगाया जाए तो पिछले कुछ सालों से लगभग डेढ से दो हजार बहुएं नेपाल से भारत के पिथौरागढ़ जिले में शादी करके आई हैं।

नेपाल की बेटीयों को शादी के बाद भी नहीं मिलती भारत की नागरिकता

अब आप सोच रहे होंगे की उत्तराखंड की बहु बनकर आई नेपाल की ये बेटीयां शादी के बाद भारत की नागरीक बन जाती होंगी? तो इसका जवाब है नहीं। यही नेपाल की बेटियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। दरअसल कानून के मुताबिक नेपाल से भारत शादी करके आई महिलाओं को भारत की नागरिकता पाने के लिए कम से कम सात साल का इंतजार करना होता है।

सात साल का करना पड़ता है इंतजार

सात साल के बाद ही वो नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकती हैं। वैसे बिना नागरिकता के कई महिलाओं ने आधार कार्ड और बाकी दस्तावेज तो बनवा लिए और कुछ लोगों के नाम वोटर लिस्ट में भी जुड़ गए। लेकिन अब नागरिकता साबित ना होने की वजह से अब उनसबके नाम हटाए जाने की संभावना है।

नागरिकता करनी होगी साबित

यानी 2027 में भारत की ये बहुएं मतदान नहीं कर पाएंगी। वहीं अगर कोई नेपाली महिला जो भारत में शादी करके आई है। वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाना चाहती है तो उसे सबसे पहले अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।

हालांकि वहीं लोग इसे लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं और प्रशासन से इस समस्या का समाधान ढूंढने की गुहार लगा रहे हैं।
अब देखना ये होगा कि क्या इसके लिए कोई नया रास्ता निकाला जा सकेगा। या फिर भारत की हजारों विदेशी बहुएं लोकतंत्र के इस उत्सव में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।

Uma Kothari

उत्तराखंड की डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय उमा कोठारी खबर उत्तराखंड (khabaruttarakhand.com) में बतौर पत्रकार कार्यरत हैं। वे राजनीति, मनोरंजन, खेल और ट्रेंडिंग विषयों पर गहन और तथ्यपरक खबरें लिखती हैं। उत्तराखंड के स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर इनकी पकड़ मजबूत है। डिजिटल मीडिया में इनका अनुभव पाठकों को सटीक, संतुलित और समय पर जानकारी देने में सहायक है। उत्तराखंड | खबर उत्तराखंड
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