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नहीं रहे मशहूर सिंगर P Jayachandran, 16000 से ज्यादा गानों को दी अपनी आवाज

मशहूर सिंगर पी जयचंद्रन(P Jayachandran Death) अब इस दुनिया में नहीं रहे। बीते दिन यानी नौ जनवरी को 80 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। अपने छह दशक से भी अधिक के करियर में सिंगर ने 16000 से ज्यादा गाने गाए।

अपनी मधुर और सुरिली आवाज के लिए वो देश के साथ-साथ विदेशों में भी फेमस थे। काफी लंबे समय से वो बिमार चल रहे थे। इलाज के दौरान निजी अस्पताल में उनका निधन हुआ। उनके निधन से सिनेमा जगत में शोक की लहर है। सोशल मीडिया पर उनके चाहने वाले सिंगर को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

मशहूर सिंगर जयचंद्रन का हुआ निधन (P Jayachandran Death)

भाव गायकन के नाम से सिंगर जयचंद्रन काफी मशहूर थे। बता दें कि जयचंद्रन ने तेलुगु,तमिल, कन्नड़ और हिंदी में कई गानों को अपनी मधुर और दर्द भरी आवाज के साथ गाया है। जिससे वो लोगों के दिलों में छा गए। फिल्मों में गीत गाने के अलावा वो कई भक्ति भरे गीत भी गा चुके है। दुनिया को अलविदा कहकर वो संगीत प्रोमियों के लिए एक उल्लेखनीय विरासत छोड़ गए हैं। वो अपने पीछे परिवार में अपनी पत्नी ललिता, बेटी लक्ष्मी और बेटा दीनानाथन को छोड़ गए हैं।

पी जयचंद्रन को इन पुरस्कारों से नवाजा गया

जयचंद्रन को कई सारे अवार्ड से नवाजा जा चुका है। जिसमें उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, पांच बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार, चार बार तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार मिले है। साथ ही केरल सरकार से जे.सी. डैनियल और तमिलनाडु सरकार से कलैइमामणि पुरस्कार भी मिला है। वहीं फिल्म ‘श्री नारायण गुरु’ में ‘शिव शंकर शरण सर्व विभो’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।

बतौर प्लेबैक सिंगर की करियर की शुरुआत (P Jayachandran Singing Career)

बतौर प्लेबैक सिंगर जयचंद्रन ने साल 1965 में फिल्म कुंजली मरक्कर के गाने ओरु मुल्लाप्पुमलमय से अपने सिंगिग करियर की शुरुआत की थी। इस गाने को पी भास्करन ने लिखा था। तो वहीं चिदंबरनाथ ने इसे कंपोज किया था। डायरेक्टर ए विंसेंट ने मद्रास में एक कॉन्सर्ट में सिंगर की आवाज सुनी। जिसके बाद उन्होंने संगीत निर्देशक जी देवराजन से उनकी सिफारिश लगाई। जिसके बाद जयचंद्रन ने 1967 में रिलीज हुई फिल्म कालिथोजन का गाना ‘मंजालयिल मुंगी तोर्थी गाया। जिसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा।

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