पढ़िए, नोटबंदी के बाद हरीश रावत ने क्यों लिखा मोदी को खत

सीएम
फाइल

देहरादून-  मुख्यमंत्री हरीश रावत ने काले धन पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने  प्रधानमंत्री का ध्यान नोटबंदी के चलते जनता को हो रही दिक्कतों से वाकिफ कराते हुए कुछ संशोधनों की जरूरत बताई है। सूबे के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने खत में नोटबंदी से जनता को हो रही कठिनाईयों के बारे में अवगत कराते हुए कहा है कि भारतीय समाज में सदियों से घर की  स्त्री परिवार की धुरी रही है। वो सबसे छिपाकर कुछ न कुछ धन अपने पास बचा कर रखती है और धीरे-धीरे वो इतनी बड़ी पूंजी बन जाती है कि उसका पता तब ही चलता है जब परिवार पर कोई संकट आता है तत्काल में कोई जरूरत पड़ती है। तब घर की स्त्री अपने उस धन को परिवार के नाम खर्च कर अपने परिवार को मुश्किल हालात से निकाल ले आती है। ऐसा सिर्फ स्त्री के पास ही नहीं बल्कि लाखों परिवार के पुरूष और छात्रों की गुल्लक, छोटे दुकानदारों पटरी रेहड़ी चलाकर जिंदगी जीने वालों के पास ऐसी पूंजी है जिसका वे लिखित उल्लेख नहीं कर सकते कि कैसे और कहां से आया। पर उनकी छोटी पूंजी  बड़ी पूजी बन गई है। अतः अापसे अनुरोध है कि ऐसे जनमानस को राहत देने के लिए कुछ छूट दी जाए। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में देश की अर्थव्यवस्था में पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 राजीव गांधी, स्व0 नरसिम्हा राव व डा0 मनमोहन सिंह के नेतृत्व में बहुत तेजी से आगे बढ़ने का हवाला देते हुए कहा कि अब देश की 1978 के दौर से से बहुत आगे निकल आयें हैं, आज छोटे व्यापारी, रेड़ी पट्री वाले भी इस अर्थ व्यवस्था में अपना खून-पसीना देकर भागीदारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में बैंकों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि उन इलाकों में स्त्रियों और पुरुषों के पास नगदी है और ऐसे धन को काले धन की श्रेणी में नहीं रखा जा  सकता। अपने खत में सीएम ने पीएम से अनुरोध किया कि, ऐसी संचित पूंजी की सीमा को कम से कम दस लाख तक जबकि न्यून्तम आयकर के भुगतान के बाद बीस लाख रूपए तक किया जाना चाहिए।  ताकि आम जनमानस को अपने परिश्रम से संचित की गई पूंजी को खोने की पीड़ा न हो।

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