ये रहा सबूत: दो कैबिनेट मंत्रियों ने बनाई पीएम मोदी की पहल से दूरी, भाजपा से नाराजगी!

देहरादून : लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत, बीजेपी के कई बड़े नेता और समर्थन ‘मैं भी चौकीदार हूं’ का जमकर प्रचार कर रहे हैं। रविवार को पीएम मोदी सहित देश के और कई बडे नेताओं ने ‘मैं भी चौकीदार हूं’ को अपने ट्विटर हैंडल पर जोड़ा और तब से यह देश मे एक नया ट्रेड बन गया है। मोदी के साथ-साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, सहित उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट, देवेंद्र फड़नवीस और कर्नाटक भाजपा प्रमुख बीएस येदियुरप्पा भी इसमें शामिल रहे और अपने नाम के आगे चौकीदार जोड़ा लिया।

भाजपा संगठन ने पीएम की पहल को सराहा लेकिन..

वहीं पीएम मोदी की पहल को उत्तराखंड भाजपा संगठन नें भी खूब सराहा और इस पहल में शामिल हुए. भाजपा के कई दिग्गजों ने भी अपने नाम के आगे चौकीदार लिखा…जिसमें सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, धन सिंह रावत, अऱविंद पांडे, रेखा आर्य सहित भाजपा के कई मंत्री-विधायकों और कार्यकर्ताओ ने भी इस मुहिम में पीएम मोदी का साथ दिया और बताया कि देश भर के लोग पीएम मोदी के साथ है.

दो कैबिनेट मंत्रियों ने बनाई पीएम मोदी की पहल से दूरी

लेकिन भाजपा संगठन के दो ऐसे दिग्गज चेहरे हैं जिन्होंने पीएम मोदी की इस पहल से दूरी बनाए रखी औऱ वो नाम हैं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए वन मंत्री हरक सिंह रावत की. जो की त्रिवेंद्र कैबिनेट मंत्री हैं. जब इनके ट्विटर हैंडल में जाकर देखा गया तो पाया गया कि हरक सिंह रावत और सतपाल महाराज दोनों ने ही अपने ट्विटर हैंडल में अपने नाम के आगे चौकीदार नहीं लिखा…जिससे लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या दोनों कैबिनेट मंत्रियों को भाजपा से कोई शिकायत या कोई नाराजगी है क्या. लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि पीएम मोदी की जिस मुहिम को सीएम से लेकर भाजपा संगठन के पदाधियारियों ने साथ दिया उसमें हरक और सतपाल महाराज पीछे क्यों रहे.

हरक के पौड़ी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लगाए जा रहे थे कयास

लोकसभा चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले क्यास लगाए जा रहे थे की पौड़ी सीट से हरक सिंह रावत दावेदार हो सकते हैं..तो क्या हरक के दिल की इच्छा दिल में ही रह गई? क्योंकि पौड़ी सीट से अब तक सबसे आगे तीरथ सिंह रावत का नाम है और इनके नाम की घोषणा भाजपा आज या कल में कर सकती है. शायद हो सकता है इसी नाराजगी के चलते हरक सिंह ने पीएम औऱ भाजपा की इस पहल में साथ नहीं दिया. वहीं बात करें सतपाल महाराज की तो राहुल गांधी के आने से पहले आशंका जताई जा रही थी की कोई बड़ा दिग्गज कांग्रेस में शामिल होगा जिसके बाद सबसे पहले सतपाल महाराज के नाम की हवा उड़ी जिसके बाद सतपाल महाराज को दिल्ली से पीसी करनी पड़़ी औऱ अफवाहों पर विराम लगाते हुए सतपालमहाराज ने कहा कि वो कांग्रेस में शामिल नहीं हो रहे हैं. लेकिन उनके ट्विटर हैंडल को देखकर भी कुछ यहीं अंदेशा लगाया जा रहा हैकि क्या सतपाल महाराज की भाजपा से औऱ सरकार से कोई नाराजगी है?

सबके मन में खटक रहा यही सवाल

मनचाहा टिकट न मिलने या मन की इच्छा पूरी न होने से क्या हरक भाजपा से नाराज है…बता दें हरक की पौड़ी सीट से ही उम्मीदवार घोषित होने की उम्मीद जताई जा रही थी साथ ही बता दें सतपाल महाराज भी पौड़ी के चौबट्टाखाल से विधायक हैं. दोनों मंत्रियों के ट्विटर हैंडल को देखकर ये सवाल तो सबके मन में खटक रहा है कि आखिर इस मुहिम में ये पीछे क्यों हैं….इनकी क्या भाजपा संगठन से कोई नाराजगी है.

अक्सर पर्यटन मंत्री कार्यक्रमों औऱ बैठकों से बनाए रखते हैं दूरी

कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुए हरक सिंह रावत वर्तमान में त्रिवेंद्र सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं जिनके पास वन विभाग है औऱ अकसर देखा जाता है कि वो अपने विभाग के प्रति सजग नहीं दिखाई देते हैं. जब राज्य के जंगलों में आग धधक रही थी और जानवर मर रहे थे तब भी हरक सिंह रावत ने ठोस कदम नहीं उठाए थे जिसको लेकर लोगों में उनके प्रति नाराजगी थी. जबकि सतपाल महाराज के पास पर्यटन विभाग है और अक्सर पर्यटन मंत्री को कई कार्यक्रमों औऱ बैठकों से गायब पाया जाता है. जिसको देखकर लगता है कि उनका मन भाजपा में कम लगता है.

खैर ये तो अब कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और सतपाल महाराज ही जानते होंगे की आखिर क्या कारण है कि वो पीएम मोदी की इस पहल में शामिल नहीं हुए औऱ उन्होंने इस पहले से दूरी बनाई.

दीपिका रावत

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