ब्रेकिंग : संस्कृत और उर्दू में छिड़ी जंग, देहरादून का स्टेशन बना अखाड़ा

देहरादून : राजधानी का रेलवे स्टेशन साइन बोर्ड के कारण एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है. रेलवे स्टेशन पर लगे साइन बोर्ड में हिंदी, अग्रेंजी और संस्कृत में स्टेशन का नाम लिखा गया है. इस साइन बोर्ड से उर्दू गायब है. हालांकि साइन बोर्ड में किये गये ये बदलाव रेलवे विभाग के फैसले के बाद किये गये हैं. मगर विभाग के फैसले में कही भी उर्दू को हटाने का जिक्र नहीं था. जिसके कारण राजधानी देहरादून के रेलवे स्टेशन का साइन बोर्ड विवादों में आ गया है।

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी रेलवे स्टेशन के साइन बोर्ड में संस्कृत भाषा का इस्तेमाल एडिशनल भाषा के तौर पर किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए साइन बोर्ड से उर्दू भाषा को नहीं हटाया जाएगा।रेलवे स्टेशन निदेशक का कहना है किनए साइन बोर्ड में गलती की बात स्वीकारी. उन्होंने कहा जल्द ही इस साइन बोर्ड को बदलकर नये बोर्ड लगाये जाएंगे, जिसमें चारों भाषाओं में स्टेशन का नाम लिखा होगा।

2 COMMENTS

  1. उत्तराखंड की द्वितीय भाषा संस्कृत है इसलिए बिल्कुल ठीक है और अगर उर्दू में नाम लिखना है तो पंजाबी मराठी गुजराती सभी २२ भाषाओं में नाम लिखना चाहिए

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