रामपुर तिराहा कांड: 32 साल बाद पकड़ा गया पुलिस का झूठ, आंदोलनकारियों को फंसाया, 3 दोषी करार

उत्तराखंड आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। करीब 32 साल बाद विशेष सीबीआई अदालत ने तीन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। तीनों को डेढ़-डेढ़ साल की जेल की सजा सुनाई गई है। साथ ही 21-21 हजार का जुर्माना भी लगा है। अदालत ने तत्कालीन प्रभारी बृजकिशोर, कॉन्स्टेबल उमेश चंद और अनिल कुमार को दोषी ठहराया है। चलिए पूरा मामला जान लेते है।
रामपुर तिराहा कांड में 32 साल बाद तीन पुलिस कर्मी दोषी करार
दरअसल 1994 के रामपुर तिराहा गोलीकांड में पुलिस ने आंदोलनकारियों को झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए अवैध हथियार बरामदगी दिखाई थी। इसी को लेकर सीबीआई जांच में ये केस पूरी तरह से फर्जी निकला। जिसके बाद आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई। 32 साल चले इस केस में अब जाकर तीन पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है।
आंदोलनकारियों को फंसाया,
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 1994 में एकऔर दो अक्टूबर की रात रामपुर तिराहा घटना से जुड़ा है। राज्य की मांग को लेकर आंदेलनकारी दिल्ली की तरफ कूच कर रहे थे। ऐसे में उन्हें मुजफ्फरनगर में ही रोक दिया गया था। जिसके बाद पुलिस ने भारी लाठीचार्ज और फायरिंग की थी। जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई थी। तो वहीं कई लोग घायल हुए थे।
इस घटना के बाद कई महिलाओं और नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न भी हुआ था। इसी को लेकर छपार पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज किए गए ।
कई मामलों में हुई सीबीआई जांच
मालूम हो कि उत्तराखंड संघर्ष समिति द्वारा ये मामला दायर किया गया। जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद CBI ने कई मामलों की जांच की। इसमें आर्म्स एक्ट के तहत चार FIR भी शामिल थीं। सुनवाई में अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी पुलिसकर्मियों ने झूठा दावा किया था।
जिसमें पुलिस ने झूठ बोला कि उत्तराखंड रोडवेज की बसों से देसी पिस्तौल, इस्तेमाल किए गए कारतूस और खुकरी बरामद की गई थीं। CBI द्वारा की गई जांच में भी ये निष्कर्ष निकला कि प्रदर्शनकारियों को फंसाने के लिए ये मनगढ़ंत हथियारों की बरामदगी की कहानी रची गई।
गैंगरेप में दो पुलिसवालों को हो चुकी है उम्रकैद की सजा
तो वहीं रामपुर तिराहा कांड से जुड़े एक अन्य मामले में साल 2024 में मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने प्रदर्शनकारी महिला के साथ गैंगरेप के आरोप में P पुलिस के दो रिटायर कॉन्स्टेबल मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।