RAIL SPECIAL – बात सिर्फ पत्थरों की है तो हमने विकास बहुत किया

आशीष तिवारी। ये सोच कर कितना अच्छा लगता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसी जगहों पर पहुंचने के लिए आपको रेल यात्रा का विकल्प मिल जाएगा। आप देश के किसी कोने से ट्रेन में बैठेंगे और उत्तराखंड में अपनी मनचाही जगह पर पहुंच जाएंगे।

इस सोच को अगर आप इक्कीस साल पुराने इतिहास के आइने में रखेंगे तो आपको विकास के दावों की हकीकत पत्थरों में खुदी इबारत से अधिक नजर नहीं आएगी।

दरअसल इसी उत्तराखंड में ऐसे पत्थर भी हैं जो इक्कीस सालों से हमारे विकास के मॉडल को मुंह चिढ़ा रहें हैं। ऐसा ही एक पत्थर देहरादून रेलवे स्टेशन पर वर्ष 1996 में लगाया गया था। तत्कालीन रेल राज्य मंत्री सतपाल महाराज ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इस पत्थर पर से पर्दा हटाया था। यानी आज से इक्कीस बरस पहले। ये पत्थर देहरादून से सहारनपुर रेलवे लाइन के सर्वे का काम शुरु होने की खुशी में लगाया गया था।

ठीक वैसे ही इक्कीस सालों बाद बदरीनाथ में एक पत्थर लगाया गया। इस पत्थर को लगाने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु आए। कहते हैं कि इतिहास खुद को दोहराता है। इक्कीस बरस के लंबे अंतराल के बाद उत्तराखंड में इतिहास का एक हिस्सा दोहराया जा चुका है। एक नया पत्थर लगाया जा चुका है। इस नए पत्थर के लगने के साथ ही ये जान लेना जरूरी है कि इक्कीस बरस पहले जिस काम के लिए पत्थर लगा था वो पूरा हुआ या नहीं।

आपको जानकर अफसोस होगा कि इक्कीस सालों पहले जिस काम के लिए पत्थर लगा वो अपने आखिरी मुकाम तक नहीं पहुंच पाया। देहरादून से सहारनपुर तक की रेलवे लाइन पिछले इक्कीस बरस में नहीं बिछ पाई। हालांकि सर्वे पूरा हो चुका है और रेलवे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक ये रेल लाइन बिछाना मुश्किल काम नहीं है।

इतिहास का ये वो हिस्सा है जिसे हम दोहराना कतई नहीं चाहते। इक्कीस बरस पहले राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी के चलते हम दूध से जल चुके हैं लिहाजा इस बार छाछ से जलना नहीं चाहते। हालांकि ये भी सच है कि उत्तराखंड में आजादी के बाद से आज तक एक इंच भी रेल लाइन नहीं बिछ पाई है। फिर भी उम्मीद करेंगे कि भविष्य, इतिहास के इस हिस्से को नहीं दोहराएगा। एक और पत्थर हमारी उम्मीदों को मुंह नहीं चिढ़ाएगा।

वैसे रेल को लेकर राज्य का अनुभव कुछ खास रहा भी नहीं है। ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेलवे लाइन को ही ले लीजिए। ये रेल लाइन भी राज्य में बीस सालों से बिछाने की कोशिश हो रही है। तीन बार तो शिलान्यास हो चुका। 125 किलोमीटर की ये रेल लाइन बीस इक्कीस बरस में नहीं बिछ पाई। हालांकि अब सुरेश प्रभु ने चार धामों तक रेल लाइन बिछाने का सपना भी दिखा दिया है।

यहां एक और रोचक तथ्य का जिक्र करना जरूरी है। 1996 में सतपाल महाराज रेल राज्य मंत्री थे। देहरादून – सहारनपुर और ऋषिकेश – कर्णप्रयाग रेल लाइन के सर्वे का शुभारंभ इन्हीं के हाथों हुआ था। अब सतपाल महाराज उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री हैं। राज्य में फिर एक बार नई रेल लाइन के सर्वे का शिलापट्ट लगाया गया लेकिन सतपाल महाराज समारोह से नदारद रहे।

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