जानें राहुल गांधी ने क्यों कहा ? मोदी हैं तो मुमकिन है

नई दिल्ली : राहुल गांधी लगातार पीएम मोदी पर ओरोप लगाते रहते हैं। उनको निशाने पर लेते रहते हैं। अब तक चीन के बहाने सवाल खड़े कर रहे थे, तो गिरती डीजीपी और अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन्फोसिस के संस्थापक एन. आर. नारायण मूर्ति के जीडीपी में आजादी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट की आशंका जताए जाने को लेकर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने नारायण मूर्ति के बयान वाली एक खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया, मोदी है तो मुमकिन है। राहुल गांधी इकॉनमी को लेकर लगातार मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। पिछले दिनों उन्होंने आरबीआई के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे का हवाला देते हुए इकॉनमी और जॉब के मोर्चे पर और ज्यादा बुरी खबरों के आने की आशंका जताई थी।

उन्होंने कहा था कि लोगों में भय और असुरक्षा अब तक के उच्च स्तर पर है, जबकि लोगों का विश्वास अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। मोदी सरकार पर उन्होंने ताजा हमला नारायण मूर्ति के बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए बयान को आधार बनाकर किया है। दरअसल, नारायण मूर्ति ने मंगलवार को आशंका जताई कि कोरोना वायरस महामारी के चलते इस वित्त वर्ष में देश की आर्थिक गति आजादी के बाद सबसे खराब स्थिति में होगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द पटरी पर लाया जाना चाहिए। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस बार जीडीपी में स्वतंत्रता के बाद यानी 1947 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दिख सकती है।

नारायण मूर्ति ने ऐसी एक नई प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया जिसमें देश की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में हर कारोबारी को पूरी क्षमता के साथ काम करने की इजाजत हो। मूर्ति ने कहा, ‘भारत की जीडीपी में कम से कम 5 प्रतिशत संकुचन का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसी आशंका है कि हम 1947 की आजादी के बाद की बससे बुरी जीडीपी वृद्धि देख सकते हैं। सॉफ्टवेयर क्षेत्र में बड़ी पहचान रखने वाले मूर्ति बेंगुलुरु में ‘भारत की डिजिटल क्रांति का नेतृत्व’ पर आयोजित एक परिचर्चा में भाग ले रहे थे। कोरोना वायरस महामारी की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को जबरदस्त नुकसान की आशंका जताते हुए उन्होंने कहा, ‘वैश्विक जीडीपी नीचे गई है। वैश्विक व्यापार डूब रहा है, वैश्विक यात्रा करीब करीब नदारद हो चुकी है। ऐसे में वैश्विक जीडीपी में 5 से 10 प्रतिशत तक संकुचन होने का अनुमान है।

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