उत्तराखंड के इस जिले में बने ऐसे क्वारंटीन सेंटर, जिनका मिलता है हजारों किराया, यहां हैं मुफ्त

उत्तरकाशी: इन दिनों प्रवासी उत्तराखंडी गांव लौट रहे हैं। पंचायतों को क्वारंटीन की व्यवस्थाएं करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन पंचायत भवनों और स्कूलों की जो हालत है, उसमें कोई रहने को तैयार नहीं है। कई स्कूल और पंचायत भवन ऐसे भी हैं, जो रहने लायक ही नहीं हैं। इन समस्याओं को उत्तरकाशी जिले के अगोड़ा गांव में शानदार समाधान निकाला गया है। गांव के बंजर खेतों में कैंपिंग टेंट लगाए गए हैं। इनमें प्रवासियों को क्वारंटाइन किया जा रहा है।

विश्व स्तरीय पर्यटक स्थल डोडीताल का बेस कैंप अगोड़ा गांव है। उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर अगोड़ा गांव में शनिवार तक विभिन्न राज्यों से 10 लोग पहुंचे हैं। इनमें 4 लोगों को जूनियर हाईस्कूल के भवन में क्वारंटाइन किया गया है। जूनियर हाईस्कूल के भवन में शारीरिक दूरी के मानकों के अनुसार 4 से अतिरिक्त लोगों के ठहरने और अतिरिक्त शौचालय की व्यवस्था नहीं हैं।

जब जगह कम पड़ने लगी तो प्रधान मुकेश पंवार ने अपनी ट्रैकिंग कंपनी माउंटेन पैराडाइज से टेंट और सिलिपिंग बैंग लिये। 18 कैंपिंग टेंट लगा दिए हैं। अभी तक छह प्रवासी युवक को प्रधान ने टेंट में क्वारंटाइन किया। पर्यटन सीजन में इन कैपिंग टैंटों के लिए पर्यटक हजारों रुपये खर्च करते हैं और इनकी कीमत भी हजार से लाख रुपये तक हैं। प्रवासियों को गैस, राशन व बर्तन भी दिए गए हैं। गांव की ओर से की गई इस व्यवस्था को लेकर सभी युवक काफी खुश है।

गांव के प्रधान मुकेश पंवार कहते हैं कि जो टेंट लगाए गए हैं वे गांव के पास ही बंजर पड़े खेतों में लगाए गए हैं। जब गांव के सभी प्रवासी युवक गांव पहुंचेंगे तो बंजर खेतों को भी उपजऊ बनाएंगे। उन्होंने बताया कि हर टेंट में केवल एक ही व्यक्ति को क्वारंटाइन किया जाएगा। साथ ही हर व्यक्ति के लिए अलग अस्थाई शौचालय भी बनाया गया है।

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