मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से मांगी माफी, जानें क्यों ?

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की गंभीरता और दुनियाभर के देशों की खतरनाक स्थिति को देखते हुए सरकार ने लॉकडाउन का बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में जनता से इसके लिए माफी भी मांगी है। साथ ही उन्होंने दुनियाभर के उदाहरण को देखकर लगता है कि यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। उन्होंने संवेदना जताते हुए कहा कि लोगों की परेशानी के लिए वह देशभर की जनता से माफी मांगते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, दुनिया के हालात देखने के बाद लगता है कि आपके परिवार को सुरक्षित रखने का यही एक रास्ता बचा है। बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है। आपको जो असुविधा हुई है, इसके लिए क्षमा मांगता हूं। लॉकडाउन के बात देशभर से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो कि किसी का भी दिल पिघला सकती हैं। शहरों में दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोग गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। लोग हजार किलोमीटर की भी दूरी की परवाह किए बिना छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे में मीडिया में लगातार ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं जो बेहद संवेदनशील हैं।

पीएम मोदी ने कहा, मैं आपकी परेशानी समझता हूं देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाये बिना कोई रास्ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ लड़ाई, जीवन और मृत्य के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है।श् मोदी ने कहा, श्बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निबटना चाहिए, बाद में रोग असाध्य हो जाते हैं तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है। आज पूरा हिंदुस्तान, हर हिन्दुस्तानी यही कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग जो कोरोना के संदिग्ध हैं उनके साथ भी बुरा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टैंसिंग बनाने की जरूरत है न कि इमोशनल डिस्टैंस बनाने की। वे लोग आपको बचाने के लिए ही क्वारंटाइन में हैं। इसलिए उनके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है। उनका सहयोग करने की आवश्यकता है। कोरोना से लड़ने का तरीका सोशल डिस्टैंसिंग है लेकिन इसका मतलब सोशल इंटरैक्शन को खत्म करने का नहीं है। यह समय रिश्तों को तरोताजा करने का है। यह समय हमें बताता है कि सोशल डिस्टैंसिंग घटाओ और इमोशनल डिस्टैंस घटाओ।

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