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वंदना कटारिया समेत उत्तराखंड के इन 4 होनहारों को राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, मिले ये अवॉर्ड

Colonel Amit Bisht honored

देहरादून : राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने उत्तराखंड निवासी पैरा शूटिंग के मुख्य कोच जय प्रकाश नौटियाल को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया. इसी के साथ भारतीय महिला हॉकी टीम की हैट्रिक गर्ल खिलाड़ी वंदना कटारिया को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। तो वहीं पर्वतारोहण में खास उपलब्धि हासिल करने को लेकर नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी (निम) के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट और पिथौरागढ़ की शीतल को भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने तेनजिग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने जय प्रकाश नौटियाल, वंदना कटारिया, कर्नल अमित बिष्ट और शीतल को बधाई दी है।

जय प्रकाश नौटियाल सम्मानित

भारतीय पैरा शूटिंग टीम के मुख्य कोच जय प्रकाश नौटियाल मूल रूप से रुद्रप्रयाग के भट्ट गांव के रहने वाले हैं। जय प्रकाश नौटियाल 1989 में भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) में भर्ती हुए थे। 1990 में उन्होंने आइटीबीपी की शूटिंग टीम बनाई थी। वर्तमान में वह भारतीय पैरा शूटिंग टीम के मुख्य कोच हैं। पैरा शूटिंग टीम से जुड़ने के बाद जय प्रकाश दिल्ली शिफ्ट हो गए।

वंदना कटारिया सम्मानित

अर्जुन पुरस्कार विजेता वंदना कटारिया उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद की रहने वाली हैं। वंदना ने टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय महिला हाकी टीम को कांस्य पदक जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।

कर्नल अमित बिष्ट सम्मानित

निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट को यह पुरस्कार पर्वतारोहण को प्रोत्साहित करने और 19 से अधिक अनाम चोटियों का आरोहण करने के लिए दिया गया है। कर्नल अमित बिष्ट के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम ने अक्टूबर 2018 में छह दिनों के अंतराल में चार चोटियों का आरोहण किया। इन चोटियों का नाम अलट-प्रथम, अटल द्वितीय, अटल तृतीय व अटल चतुर्थ रखा गया है। इसी के साथ पहली बार भारत-चीन सीमा पर निम के प्रधानाचार्य कर्नल अमित बिष्ट ने आइटीबीपी के साथ 6 अनाम चोटियों का सफल आरोहण किया। नेलांग से माणा तक की लंबी दूरी गश्त भी की। इसी वर्ष कर्नल अमित बिष्ट ने एवरेस्ट का भी सफल आरोहण किया है।

शीतल सम्मानित

पिथौरागढ़ की शीतल को भी तेनजिग नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। शीतल ने कठिन परिस्थितियों में पर्वतारोहण में खास उपलब्धि हासिल की है। माउंट एवरेस्ट के सफल आरोहण के साथ शीतल ने वर्ष 2017 में विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा (28169 फीट) का सफल आरोहण का विश्व रिकार्ड बनाया है। इस चोटी का आरोहण करने वाली शीतल सबसे कम उम्र की पर्वतारोही है। उस समय शीतल की उम्र 22 वर्ष थी। शीतल बहुत ही गरीब परिवार से आती है। उसके पिता पिथौरागढ़ में लोकल टैक्सी चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं।

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