बिना स्नातक पास किए हासिल की 3 विषयों में स्नातकोत्तर की डिग्री, बना पीसीएस अफसर

अफसर बनने के लिए बहुत पढ़ाई-मेहनत करनी पड़ती है। स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई करनी पड़ती है और डिग्रियां हासिल कर उसके बल पर हम पीसीएम की तैयारी करते हैं और परीक्षा में सफल होकर पीसीएस अफसर या जो हमारी मंजिल है वो हासिल करते हैं लेकिन क्या आपने बिन डिग्रियों के पीसीएम अफसर बनते किसी को देखा है तो आप कहेंगे नहीं ऐसे कैसे कोई बिना डिग्रियों के अफसर बनेगा। लेकिन ये सच हुआ है पंजाब में..जी हां पंजाब में एक गजब का मामला सामने आया है जिसे देख सरकार खुद हैरान है और पीसीएस अधिकारी के खिलाफ एक्शन लिया गया है। जी हां बता दें कि पंजाब में बिना स्नातक पास किए तीन विषयों से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल कर एक व्यक्ति पीसीएस अफसर भी बन गया। वहीं जब इसकी जानकारी पंजाब सरकार को लगी तो उसे पद हटा दिया गया है औऱ तो वहीं अब पीसीएस अफसर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है।

एसडीएम पद पर तैनात थे

वहीं इस पर हाईकोर्ट ने पीसीएस को कोई राहत नहीं दी और इसका पंजाब सरकार से जवाब मांगा। जानकारी मिली है कि पंजाब के पूर्व पीसीएस अधिकारी रमन कुमार कोचर दीनानगर में एसडीएम पद पर तैनात थे। उनके पास दो विषय में एमए और एमबीए की डिग्री है लेकिन स्नातक की डिग्री नहीं है। जब सरकार ने उनसे स्नातक की डिग्री मांगी तो वो दिखाने में असमर्थ रहे। जिसके बाद मुख्य सचिव ने बीते सप्ताह उनको उसके मूल विभाग में वापस जाने के आदेश दिए थे। मुख्य सचिव ने अपील करने के लिए 10 दिन का समय दिया था। वहीं पीसीएस ने मुख्य सचिव के आदेश को चुनौती दी।

याचिकाकर्ता(पीसीएस अफसर) ने कहा कि उसने अन्नामलाई यूनिवर्सिटी से इतिहास विषय में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की औऱ इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से पंजाबी में एमए और पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे मनजीत सिंह बनाम पंजाब सरकार मामले की फुल बेंच द्वारा दिए गए फैसले का लाभ दिया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधवालिया ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। हालांकि हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के पीसीएस पद से हटाने के आदेश पर रोक लगाने की उसकी मांग खारिज कर दी है। हाईकोर्ट का कहना है कि जिसके पास डिग्री नहीं है ऐसे में उसको महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा व्यक्ति अंतरिम राहत का हकदार नहीं है । कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

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