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अब राजधानी की सड़कों पर दौड़ेंगी पॉड टैक्सी, पहले चरण में छह किमी लंबे रूट पर होगा संचालन

राजधानी देहरादून में जाम से निजात और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के सड़कों पर जल्द ही पॉड टैक्सी दौड़ेंगी। जल्द ही दून में यातायात का पीआरटी सिस्टम लागू किया जाएगा। हरिद्वार के बाद देहरादून ऐसा दूसरा शहर होगा जहां पॉड टैक्सी चलाने की तैयारी है।

राजधानी की सड़कों पर भी पॉड टैक्सी के संचालन की तैयारी

प्रदेश में जाम एक ऐसी समस्या है जो हर शहर के लोगों को परेशान कर रही है। इस से निजात पाने के लिए सरकार खासी तैयारियां कर रही है। राजधानी दून में टजाम से निजात और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाने के लिए सरकार यातायात का पीआरटी सिस्टम लागू करने जा रही है।

इस व्यवस्था के तहत देहरादून में पॉड टैक्सी के संचालन की तैयारी की जा रही है। देहरादून हरिद्वार के बाद प्रदेश का दूसरा ऐसा शहर है जहां पॉड टैक्सी चलाने की तैयारी है। सिंगापुर की तर्ज पर दून में पर्सनल रैपिड ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट यानी पीआरटी के तहत बिना ड्राइवर वाली पॉड टैक्सी चलाने की योजना पर सहमति बन गई है।

जहां नियो मेट्रो नहीं चल सकती वहां चलेगी पॉड टैक्सी

देहरादून में नियो मेट्रो का काम भी तेजी से चल रहा है। जिन स्थानों पर नियो मेट्रो नहीं चल सकती वहां पर पीआरटी लागू करने की बात चल रही है। पीआरटी सिस्टम  जाम से निजात तो दिलाएगा ही इसके साथ ही  सार्वजनिक परिवहन को मजबूत भी बनाएगा। इसके तहत पॉड टैक्सी या विशेष तौर पर निर्मित गाइडवे नेटवर्क पर 4-6 यात्रियों की क्षमता वाले वाहन संचालित किए जाएंगे।

रोप-वे के स्थान पर चलेगी पॉड टैक्सी

देहरादून में पॉड टैक्सी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक छह किमी तक चलाया जाएगा। पहले इस रूट पर रोप-वे चलाने की योजना थी। लेकिन अब इस रूट पर पॉड टैक्सी का संचालन किया जाएगा। शहर की यातायात समस्या को देखते हुए मुख्य सचिव ने शहर में पीआरटी सिस्टम को जल्द लागू कराने के निर्देश दिए हैं।

क्या है पॉड टैक्सी ?

पॉड टैक्सी को पीआरटी या पर्सनल रैपिड ट्रांसपोर्ट भी कहा जाता है। ये पूरी तरह स्वचालित होती है। इसको चलाने के लिए किसी ड्राइवर की जरूरत नहीं होती है। ये कार के आकार की होती है। इसमें एक बार में तीन से लेकर छह तक यात्रियों को ले जाया जा सकता है।

 पॉड टैक्सी सड़क पर नहीं बल्कि स्टील के ट्रैक पर चलती है। ये ड्राइवरलेस कार कॉलम पर बने स्ट्रक्चर पर चलेगी। ये कार यात्रियों के बटन दबाने पर उनके पास खुद पहुंच जाएगी। दुनिया में पहली बार पॉड टैक्सी 1970 में टैक्कासी वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में चलाई गई थी।

Yogita Bisht

योगिता बिष्ट उत्तराखंड की युवा पत्रकार हैं और राजनीतिक और सामाजिक हलचलों पर पैनी नजर रखती हैंं। योगिता को डिजिटल मीडिया में कंटेंट क्रिएशन का खासा अनुभव है।
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