पायलट दीपक साठे अगर ऐसा नहीं करते तो चली जाती कई जानें, दे गए बड़ी सीख

कोझिकोड में हुए प्लेन हादसे में एयर इंडिया के पायलट दीपक साठे ने अपनी जान कुर्बान कर कई लोगों की जान बचाई। उन्होंने अपने अनुभव और सूझबूझ से कई लोगों के परिवार को उजड़ने से बचा लिया। सबसे अच्छी बात यह रही कि प्लेन में आग नहीं लगी। अगर प्लेन में आग लग जाती तो हादसा और भयावह हो सकता था। कई लोगों की जानें जा सकती थीं। दीपक के चचेरे भाई और दोस्त नीलेश साठे ने फेसबुक पोस्ट के जरिए बताया कि दीपक ने किस तरह प्लेन को आग लगने से बचाया।

नीलेश साठे ने कहा की प्लेन के लैंडिंग गियर्स ने काम करना बंद कर दिया था। दीपक ने एयरपोर्ट के तीन चक्कर लगाए, ताकि फ्यूल खत्म हो जाए। तीन राउंड के बाद प्लेन लैंड करवा दिया। उसका राइट विंग टूट गया था। प्लेन क्रैश होने से ठीक पहले इंजन बंद कर दिया। इसलिए एयरक्राफ्ट में आग नहीं लगी। दीपक को 36 साल का अनुभव था। वे एनडीए पासआउट और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर अवॉर्डी थे। 2005 में एयर इंडिया ज्वाइन करने से पहले 21 साल तक एयरफोर्स में रहे थे।

उन्होंने कहा कि दीपक ने पिछले हफ्ते मुझे कॉल किया था और हमेशा की तरह खुश थे। मैंने वंदे भारत मिशन के बारे में बात की। वे अरब देशों में फंसे भारतीयों की वतन वापसी करवाने से खुश थे। मैंने पूछा- दीपक कई देश पैसेंजर्स को एंट्री नहीं दे रहे तो क्या आप खाली एयरक्राफ्ट उड़ा रहे हैं? उन्होंने कहा, बिल्कुल नहीं। हम उन देशों के लिए फल, सब्जियां और दवाएं ले जाते हैं। एयरक्राफ्ट कभी खाली नहीं जाते। ये मेरी उनसे आखिरी बातचीत थी।

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