मरीज की छोड़िए दून अस्पताल की खुद हालत खराब, नया मामला आया सामने

देहरादून : उत्तराखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल अपनी बदहाली आंसू रो रहे हैं. बात अगर कुमाऊं के सबसे बड़े सुशीला तिवारी अस्पताल(हल्द्वानी) की करे या राज्य के सबसे बड़े अस्पताल की हालात एक जैसे हैं. मरीजों से भरे पड़े राज्य के सबसे बड़े दून अस्पताल में स्वास्थय व्यवस्था चरमराई हुई है. आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिससे राज्य के स्वास्थय विभाग को मूंह की खानी पड़ रही है. डॉक्टर-नर्स स्टॉफ मस्त हैं और मरीज पस्त हैं….बीते दिनों हुआ जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा बरकरार है हालांकि असल कारण क्या है ये जानने के लिए जांच की जा रही है.

डॉक्टर को भगवान के समान माना जाता है लेकिन अगर भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर की वजह से किसी बेगुनाह मरीज की जान और उसके बच्चे की जान चली जाए तो शायद लोगों का ऐसे भगवान से भी भरोसा उठ जाए. हम ये नहीं कह रहे की गलती मरीज या उसके परिजनों की नहीं रहती होगी लेकिन राज्य के जिलों से आए दिन आ रही शिकायतें जरुर सोचने पर मजबूर कर रही है. औऱ अगर हम दून अस्पताल को बिमार कहें तो कुछ गलत नहीं होगा…क्योंकि न तो अस्पताल में डॉक्टर टाइम पर मिलते है औऱ न हीं स्वास्थय सुविधाएं हैं.

दून अस्पताल का मामला, बेड तक नहीं हुआ नसीबती

ताजा मामला दून अस्पताल से फिर सामने आया है जिसमें एक हरिद्वार निवासी ने अपनी पत्नी का ऑपरेशन 4 तरीख को करवाया था….लेकिन अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई…जिसके बाद छह दिन पहले वो अपनी पत्नी को लेकर दून अस्पताल आया लेकिन यहां इलाज तो दूर मरीज को बेड तक नसीब नहीं हुआ. महिला 6 दिन से इलाज के लिए तरस रही है लेकिन स्वास्थय विभाग शायद अंधा सा हो गया है.

महिला के ऑपरेशन के बाद हो गए थे टांके खराब और बिगड़ थी गयी तबीयत 

महिला के पति का कहना है कि महिला के ऑपरेशन के बाद टांके खराब हो गए थे और तबीयत बिगड़ गयी थी और अब महिला के पेट में रसौली बताई जा रही है. जिसके बाद उसे यहां लाया गया लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी पत्नी को दून यानी की राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में बेड़ तक नसीब नहीं होगा. मरीज महिला स्ट्रेचर में दिन रात काट रही है.

सवाल कई हैं लेकिन जवाब किसी का भी नहीं 

राज्य में स्वास्थय व्यवस्था इतनी चरमराई हुई है कि मरीजों को अस्पतालों में बेड़ भी नसीब नहीं हो रहे हैं और डॉक्टर हैं लेकिन वह मरीजों को देखना या उनका हाल-चाल पूछना तक पसंद नहीं करते. ऐसे में मरीज जाए तो जाए कहां. ये बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक लोग आस लिए यहां आते रहेंगे और कब तक इस अस्पताल में ऐसे ही परेशानी का सामना करेंगे….आखिर कब तक राज्य की राजधानी कहलाए जाने वाले देहरादून के अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ विभाग का रवैया ऐसे रहेगा. सवाल कई हैं लेकिन जवाब किसी का भी नहीं मिल रहा है.

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