उत्तरकाशी : 133 गांवों में 216 बच्चों का जन्म लेकिन एक भी बेटी नहीं, मचा हड़कंप

उत्तरकाशी : मोदी सरकार के स्लोगन बेटी बचाओं-बेटी बढ़ाओं को लोग कितना मान रहे हैं और ये कितना साकार हो रहा है..इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक जिले के 133 गांवों में 216 बच्चों का जन्म होता है लेकिन उनमे एक भी बेटी शामिल नहीं है जो कि अपने आप में हैरानी की बात है…हालांकि ये जांच का विषय है कि आखिर ऐसा कैसा हुआ क्या इसके पीछे कोई गहरा राज है?

तीन महीने में 133 गांवों में 216 बच्चों का जन्म लेकिन एक भी बेटी नहीं

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरकाशी जिले में सर्वै करने पर पता चला कि तीन महीने में 133 गांवों में 216 बच्चों का जन्म हुआ लेकिन उनमे से एक भी बेटी नही थी. ऐसे में ये भविष्य के लिए खतरनाक है औऱ साथ ही अभी हैरानी वाली बात भी है.  बच्चियों के घटते लिंगानुपात की उत्तरकाशी जिले की ये तस्वीर और सरकारी आंकड़ों में इस भयावह स्थिति का खुलासा होने पर हरकत में आए जिला प्रशासन ने इसकी पड़ताल शुरू कर दी है।

स्वास्थय विभाग समेत कई अधिकारी हैरान

वहीं आपको बता दें कि उत्तरकाशी जिले की इस सरकारी रिपोर्ट से स्वास्थय विभाग सहित अधिकारियों और सामाजिक संगठनों में हड़कंप मच गया है. सरकारी रिपोर्ट में ही बिगड़ते लिंगानुपात की यह स्थिति सामने आने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

विधायक औऱ जिलाधिकारी ने की आशा कार्यकर्ताओं से बैठक

बृहस्पतिवार को गंगोत्री विधायक गोपाल रावत और जिलाधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने संबंधित गांवों की आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। दोनों ने इस मामले को लेकर आशा कार्यकर्ताओं से बात की और ऐसा होने के कारणों की भी पड़ताल करने की कोशिश की। डीएम ने बताया कि सभी संबंधित गांवों को रेड जोन में शामिल किया गया है। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की ओर से भेजी गई रिपोर्ट नियमित रूप से मदर चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए। वहीं, विधायक ने एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा।

उत्तरकाशी जिले में ऐसी स्थिति कर रही अधिकारियों को असहज

बता दें कि हरियाणा में लिगांनुपात सबसे कम है. जिसको देखते हुए बेटियों को बढ़ावा देने और कन्या भ्रूण हत्या निषेध के तहत भ्रूण हत्या पर पाबंदी लगाने के लिए कई अभियान चलाए गए लेकिन कहीं न कहीं लोगों ने इस अस्वीकार करते हुए बेटियों को बोझ माना लेकिन सरकार ने सख्ताई दिखाते हुए कड़े कानून बनाए इसके बावजूद उत्तरकाशी जिले में ऐसी स्थिति अधिकारियों को असहज कर रही है कि ऐसे कैसे मुमकिन है जो की जांच का विषय है.

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