उत्तराखंड में महंगी हुई शराब, आबकारी नीति की अधिसूचना जारी

देहरादून: राज्य में अगले वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए आबकारी नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके साथ ही एक अप्रैल से शराब की दुकानों की लाइसेंस फीस, न्यूनतम जमानत राशि, अतिरिक्त उठान पर शुल्क, आवेदन शुल्क में चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 15 से 20 फीसद तक इजाफा हो जाएगा। देशी मदिरा पर उत्पाद शुल्क देय नहीं होगा। शराब की दुकानों से राजस्व का जिलेवार लक्ष्य तय किया गया है।

सबसे ज्यादा राजस्व 437 करोड़ का लक्ष्य देहरादून जिले पर

सबसे ज्यादा राजस्व करीब 437 करोड़ का लक्ष्य देहरादून जिले पर है। सबसे कम 32 करोड़ राजस्व जुटाने का लक्ष्य रुद्रप्रयाग को मिला है। दुकानों को एकल या समूह बनाकर आवंटित किया जा सकेगा। एक समूह में अधिकतर चार शराब की दुकानें होंगी। पिछली बार की तरह नए साल में भी दुकानों के आवंटन के लिए जिलाधिकारी को जवाबदेह बनाया गया है। नई नीति को क्रियान्वित करने में चालू माह मार्च में कम समय शेष बचने के कारण शराब की दुकानों के व्यवस्थापन और आवंटन की अवधि एक माह आगे यानी 30 अप्रैल तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

राज्य मंत्रिमंडल ने बीती 12 मार्च को अगले वित्तीय वर्ष के लिए नई आबकारी नीति पर मुहर लगाई थी। सोमवार को अपर मुख्य सचिव डॉ रणबीर सिंह ने उक्त नीति की अधिसूचना जारी की है। नई आबकारी नीति एक अप्रैल से प्रभावी होगी, लेकिन शराब की दुकानों का व्यवस्थापन अगले माह अप्रैल तक खिसकाने के साथ ही यह तय किया गया है कि मौजूदा दुकानों के संचालकों को ही नई आबकारी नीति में तय दरों पर अगले एक माह तक आवंटित किया जा सकेगा।

यदि कोई दुकान संचालक का इच्छुक नहीं है तो उक्त दुकान का व्यवस्थापन स्थानीय आधार पर पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर एक माह के लिए निर्धारित राजस्व पर आवंटित की जाएगी। यदि निर्धारित राजस्व पर कोई दुकान लेने के लिए इच्छुक नहीं हो तो ऐसी स्थिति में दुकान अधिकतम प्राप्त राजस्व पर दैनिक आधार पर चलाई जाएगी।

वर्ष 2018-19 से शराब के ठेकों के लिए ई-टेंडरिंग होगी। अभी तक यह व्यवस्था लॉटरी के जरिये की जाती थी। इसके साथ ही सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए आबकारी लक्ष्य 2310 करोड़ से बढ़ाकर 2550 करोड़ रुपये कर दिया है। इस बार आबकारी राजस्व में दस फीसद यानी 240 करोड़ की बढ़ोतरी की गई है।

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