नैनीताल सीट – मोदी नाम के सहारे जीतेंगे अजय भट्ट या हरदा करेंगे आरपार

नैनीताल संसदीय सीट पर चुनावी जंग इस बार खासी दिलचस्प बनी हुई है। इस सीट पर दो ऐसे उम्मीदवार चुनाव मैदान में लोकसभा प्रत्याशी के तौर पर हैं जो दो साल पहले हुए विधानसभा चुनावों में हार का स्वाद चख चुके हैं। कांग्रेस के टिकट पर हरीश रावत चुनाव लड़ रहें हैं तो बीजेपी ने अजय भट्ट को टिकट दिया है।

नैनीताल सीट हमेशा से पूरे देश के लिए दिलचस्पी की वजह रही है। किसी समय में इस सीट से जीत कर नारायण तिवारी जैसे बड़े कांग्रेसी नेता संसद तक पहुंचे थे। इस सीट पर हमेशा से कांग्रेस का दबदबा माना जाता रहा है। 1999 से लेकर 2009 तक लगातार तीन बार ये सीट कांग्रेस के खाते में गई। 2014 की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की। हालांकि 1998 के चुनावों में यहां बीजेपी की इला पंत जीती थीं लेकिन 1996 में यहां कांग्रेस के एनडी तिवारी जीत कर आए थे। इसके पहले 1991 में से यहां बीजेपी के टिकट पर बलराज पासी जीत कर आए थे।

इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हरीश रावत का सियासी कद बेहद ऊंचा है। वो काफी लंबे समय तक केंद्र में मंत्री रह चुके हैं तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर भी कुर्सी संभाल चुके हैं। तमाम विरोधाभाषों के बीच हरीश रावत की छवि उत्तराखंड में एक जननेता की रही है जिसका अपना जनाधार है। पिछले कुछ समय से हरीश रावत लगातार नैनीताल और आसपास के इलाकों में चुनावी तैयारियां करते रहे हैं। शुरुआती दौर में कयास लगाए जा रहे थे कि हरीश रावत को हरिद्वार से टिकट मिल सकता है लेकिन हरीश रावत इसके लिए तैयार नहीं थे। नैनीताल संसदीय सीट पर हरीश रावत को ऊधमसिंह नगर के इलाकों से अच्छी बढ़त की उम्मीद है।

वहीं बीजेपी ने इस सीट से अजय भट्ट को टिकट देकर नया दांव खेला है। अजय भट्ट को रानीखेत विधानसभा सीट से भी टिकट मिला था लेकिन दो साल पहले हुए चुनावों में वो हार गए। जाहिर है कि उन्हें रानीखेत के लोगों ने रिजेक्ट कर दिया था। अब एक बार फिर अजय भट्ट मैदान में हैं लेकिन इस बार कहानी अलग है। इस बार अजय भट्ट की अपनी छवि से अधिक नरेंद्र मोदी की छवि उनके साथ चल रही है। अजय भट्ट को मौजूदा सांसद भगत सिंह कोश्यारी का पूरा साथ मिला हुआ है। कोश्यारी लगातार अजय भट्ट के लिए चुनाव प्रचार करते नजर आ रहें हैं। हालांकि चर्चाएं हैं कि कोश्यारी अपने सियासी शिष्य पुष्कर धामी के लिए सांसद का टिकट मांग रहे थे लेकिन पार्टी ने नहीं दिया।

अजय भट्ट को संगठन का साथ तो मिल ही रहा है इसके साथ ही मिलनसार व्यक्तित्व उन्हें लोकप्रिय बना रहा है लेकिन हरीश रावत से सियासी जंग के लिए अजय भट्ट को खासी मेहनत करने की जरूरत है। हरीश रावत इस पूरे चुनाव में चर्चाओं में बने हुए हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि 11 अप्रैल को जनता किसे चुनती है।

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