‘मैं भी चौकीदार’ के मेगा शो पर बोले PM, आलोचकों ने मुझे ज़्यादा मशहूर किया

देहरादून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कार्यक्रम के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया. इस कार्यक्रम को देशभर के 500 स्थानों पर प्रसारित किया जा रहा है. वहीं इस दौरान पीएम मोदी ने  वीडियो कांफ्रेंसिंग कर उत्तराखंड की 5 लोकसभा सीटों पर भी संवाद साधा. देहरादून में इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, लोकसभा चुनाव के प्रभारी थावर चंद गहलोत समेत भाजपा के कई पदाधिकारी और विधायक भी मौजूद रहे.

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आलोचकों ने मेरी प्रसिद्धि ज्यादा कर दी है। मोदी ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान के तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशेवर, कारोबारियों व चौकीदारों से सीधे बातचीत कर रहे हैं।

जनता को राजमहाराजाओं की नहीं चौकीदारों की जरूरत है-पीएम

इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि देश की जनता को राजमहाराजाओं की नहीं चौकीदारों की जरूरत है. पीएम मोदी ने कहा संवाद कर लोगों का धन्यवाद अदा किया और कहा कि देश के लाखों करोड़ों लोगों से संवाद करने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ.

आलोचकों ने मुझे ज़्यादा मशहूर किया-पीएम

चुनाव के अवसर में ये एक ऐसा अवसर है जिस पर सबकी नज़र होना स्वाभाविक है. इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे आलोचकों ने मेरी प्रसिद्धि ज़्यादा की अपने आलोचकों का तह-ए-दिल से आभार व्यक्त करता हूं. आगे पीएम मोदी ने कहा कि गुजरात का मुख्यमंत्री रहते मेरी बहुत आलोचनाएं हुई जिससे लोगों में एक जिज्ञासा आयी मेरे बारे में जानने की औऱ उसके बाद मुझे जो दायित्व मिला है उसको चौकीदार के रूप में निभाने का मेरा प्रयास जारी है और रहेगा.

मैं कभी भी जनता के पैसों पर पंजा नहीं पड़ने दूं-पीएम

पीएम मोदी ने संवाद करते हुए कहा कि मेरी कोशिश रहेगी कि मैं कभी भी जनता के पैसों पर पंजा नहीं पड़ने दूं. एक चौकीदार के रूप में मैं मेरी ज़िम्मेदारी निभाउंगा लेकिन कुछ लोगों की बौद्धिक मर्यादाएं रहती हैं. उनका ज़्यादा विकास नहीं होता है. उनकी बस एक मानसिक मर्यादा है वो लोग सोचते हैं चौकीदार ने टोपी पहनी है, सीटी बजा रहा है ये उनकी सोचने की मर्यादा है जबकि चौकीदार एक स्प्रिट है एक भावना है.

देश के कोने-कोने में बैठा हर व्यक्ति चौकीदार

चौकीदार न कोई व्यवस्था है, न कोई यूनिफॉर्म की पहचान है न कोई चौखट में बंधा है। चौकीदार एक स्प्रिट है, एक भावना है। गांव में, शहर में रहने वाला हर शख़्श चौकीदार, पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ हो हर व्यक्ति चौकीदार। मुझे विश्वास है कि देश की जनता चौकादार पसंद करती है। देश की जनता को राजा-महाराजाओं की जरूरत नहीं है और इसलिए मुझे खुशी है कि चौकादार का भाव निरंतर विस्तार होता जा रहा है। कांग्रेस चौकीदार का मतलब समझ नहीं पा रही है।

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