शहीद कैप्टन के पिता के बोल- मेरा बेटा बहादुर, वो हर हर परिस्थिति में लड़ना जानता है

कुन्नूर में हुए हेलिकॉप्टर क्रैश में गंभीर रूप से घायल हुए गैलेंट्री अवॉर्ड विनर ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह जिंदगी की जंग हार गए। बता दें कि वरुण सैन्य परिवार से आते हैं। परिवार तीनों सेनाओं से जुड़ा है। वरुण के पिता रिटायर्ड कर्नल केपी सिंह आर्मी एयर डिफेंस की रेजिमेंट में थे। कर्नल केपी सिंह के दूसरे बेटे और ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह के छोटे भाई लेफ्टिनेंट कमांडर तनुज सिंह इंडियन नेवी में हैं।

मेरा बेटा बहादुर है और वह हर परिस्थिति में लड़ना जानता है।-पिता

वरुण के पिता केपी सिंह भोपाल में रहते हैं। उन्होंने वरुण के अस्पताल में इलाज के दौरान कहा था कि मेरा बेटा बहादुर है और वह हर परिस्थिति में लड़ना जानता है। छोटे बेटे तनुज की बेटी के बर्थडे में शामिल होने वे मुंबई गए थे, वहीं उन्हें हादसे की सूचना मिली।

सर्जरी के लिए जाने से पहले पत्नी से करना चाहते थे बात

वरुण सिंह के परिवार में पत्नी और एक बेटा-बेटी है। सर्जरी के लिए जाने से पहलेवो पत्नी से बात करना चाहते थे। उन्हें CDS बिपिन रावत को रिसीव करने के लिए प्रोटोकॉल ऑफिसर बनाया गया था। वरुण ने चंडीगढ़ के चंडी मंदिर स्कूल से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। 2004 में उनका NDA में सिलेक्शन हो गया।

देवरिया के रहने वाले ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को इसी साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया था। उन्हें यह अवॉर्ड फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम खराब होने के बाद भी 10 हजार फीट की ऊंचाई से तेजस विमान की सफल लैंडिंग कराने पर दिया था। वरुण ने आपदा के समय धैर्य नहीं खोया और आबादी से दूर ले जाकर विमान की सफल लैंडिंग कराई थी।

वरुण के पिता केपी सिंह मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं, लेकिन भोपाल की कोर 24 से रिटायर्ड होने के बाद यहीं बस गए। वे भोपाल की एयरपोर्ट स्थित सनसिटी कॉलोनी के इनरकोर्ट अपार्टमेंट की 5वीं मंजिल पर रहते हैं। सिंह के पड़ोसी और लेफ्टिनेंट कर्नल ईशान आर ने बताया कि दो सप्ताह पहले ही वरुण भोपाल आए थे और 10 दिन यहीं रुके थे। आज बेटे को खोने का गम तो है लेकिन उन्हें गर्व है उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here