केंद्रीय राज्यमंत्री का पत्र वायरल, स्कूल की दशा से ज्यादा स्कूल चलाने वालों की चिंता

देहरादून : इन दिनों सोशल मीडिया में केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा का एक लेटर वायरल हो रहा है…जिससे उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल सा आ गया है विपक्ष ने भी इसको लेकर कई सवाल खड़े किए हैं. हालांकि केंद्रीय वस्त्र मंत्री द्वारा जारी लेटरों की संख्या दो है लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया पर अजय टम्टा द्वारा दिया गया एक लेटर ने हड़कंप मचा रखा है और साथ ही सरकार पर कई सवालिया निशान भी खड़े किए हैं.

आरएसएस के स्कूलों पर पैसा खर्च

दरअसल केंद्रीय वस्त्र राज्यमंत्री अजय टम्टा अपनी सांसद निधि के पैसों को केवल आरएसएस द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों में खर्च कर रहे हैं. जिसका जीता जागता उदाहरण ये लेटर है जो की खुद अजय टम्टा ने अल्मोड़ा जिलाधिकारी को दिया है.

जिलाधिकारी को लिखा पत्र

आपको बता दें ये पत्र अल्मोड़ा जिलाधिकारी को 28 फरवरी को लिखा गया है जिसमे मंत्री अजय टम्टा ने अपनी सांसद निधि का पैसा सरस्वती शिशु मंदिरों के कमरों के निर्माण के लिए दिया है वो भी 5 से 10 लाख तक की सांसद निधि.

सरकारी स्कूलों की दशा पर कभी नहीं जाती मंत्रियों का ध्यान

बड़ा सवाल है कि राज्य में सरकारी स्कूलों की दशा सबसे ज्यादा बिगड़ी हुई है लेकिन सरकार के मंत्रियों की नजर कभी उनपर नहीं गई लेकिन आरएसएस द्वारा संचालित हो रहे स्कूलों पर खूब पैसा लुटाया जा रहा है जो की बताता है कि सरकार औऱ सरकार के मंत्री किसी नीति पर काम कर रहे हैं.

बड़ा सवाल क्या बाकी सभी स्कूल चकाचक हैं?

चलो मान भी लिया जाए की भवनों की जर्जर हालात को देखते हुए विधायक निधि से पैसा दिए जाने की घोषणा की लेकिन क्या सिर्फ आरएसएस द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों की ही हालत जर्जर है बाकी निजी स्कूलों और सरकारी स्कूली की नहीं. क्या बाकी सभी स्कूल चकाचक हैं.

खबर उत्तराखंड द्वारा बीते दिन प्रकाशित उत्तरकाशी सरकारी स्कूल की खबर से खुली दावों की पोल

ताजा उदाहरण आपको बीते दिन देखने को मिला…उत्तरकाशी के चोपड़ा गांव में प्राथमिक विद्यालय की हालत कितनी दयनीय थी. बच्चों के बैठने तक के लिए कक्षा नहीं है. कक्षा की छत कभी भी गिरकर धरती पर आ सकती है…इसलिए अब शिक्षक भी बच्चों को क्लास में पढ़ाने से कतरा रहे हैं औऱ बच्चों को ठंड में बाहर बैठाकर पढाया जा रहा है औऱ सितम ढाया जा रहा है.

स्कूल की दशा से ज्यादा स्कूल चलाने वालों की चिंता

सवाल यहां खड़ा होता है कि जनता के द्वारा चुने गए मंत्रियों को जनता की नहीं बल्कि अपने सगे-संबंधियों की ज्यादा चिंता है…स्कूलों की दशा कैसी है इससे ज्यादा मंत्री-नेताओं को इस बात की चिंता और इस बात पर ध्यान रहता है कि ये स्कूल किस पार्टी और किस महाशय का है. इसका अंदाजा इस लेटर को देखकर लगाया जा सकता है दी राज्यमंत्री को किसकी ज्यादा चिंता है.

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