सीएम के विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीण परेशान, प्रशासन मौन, जिम्मेदार कौन?

डोईवाला- (जावेद हुसैन)- डोईवाला विधानसभा के कई गांव आज भी ऐसे हैं जहां ग्रामीण आजाद भारत के 71 वर्ष बाद भी सड़क बनने का इंतजार कर रहे हैं। जी हां शायद आपको हैरानी होगी उत्तराखंड की राजधानी के ग्रामीण इलाकों के हालात जानकर…जहां आज भी लोग सड़क के नाम पर गड्ढों और कीचड़ में चलने को मजबूर हैं.

सीएम की विधानसभा क्षेत्र डोईवाला के गांव लिस्ट्राबाद तुड़ान गांव के हालात बद्तर

जी हां हम बात कर रहे हैं सीएम की विधानसभा क्षेत्र डोईवाला के गांव लिस्ट्राबाद तुड़ान गांव की, जहां भारत को आजाद हुवे 71 साल बीत जाने के बावजूद भी यहाँ के लोग व स्कूली छात्र गढ्ढों व कीचड़ में चलने को मजबूर है। यह सड़क वन विभाग के अंतर्गत बड़कोट रेंज में पड़ती है, जिसकी  वन विभाग सुध लेने को तैयार नहीं है। हालांकि वन विभाग द्वारा एक साल पहले पत्थर की एक सीलिंग जरूर बिछा दी गयी थी  लेकिन बजट के अभाव में सड़क निर्माण कार्य आधर में लटका हुवा है। समाजसेवी नितेश कृषाली ने मांग की है कि सड़क का निर्माण शीघ्र होना चाहिये, ताकि स्कूल जाने वाले बच्चों व ग्रामीणों को सड़क पर चलने से होने वाली परेशानियों से निजात मिल सके।

ग्रामीण खुद उतरे सड़कों पर, की सफाई

वर्तमान में सड़क की खराब स्थिति को देखते हुवे ग्रामीणों ने आज खुद ही श्रमदान कर सड़क किनारे उगी झाड़ियों की साफ सफाई की। ग्रामीणों द्वारा वन विभाग व जनप्रतिनिधियों से कई बार गुहार लगाए जाने के बावजूद भी वन महकमा ग्रामीणों की समस्याओं पर पर्दा डाले है…जिसको आज ग्रामीणों ने श्रमदान कर आईना दिखाने का काम किया है।

ऐसे कैसे पढ़ेगा इण्डिया और कैसे आगे बढ़ेगा इण्डिया

आपको बता दें कि यह सड़क घने जंगल के किनारे है और दो सरकारी स्कूलों को गांव से जोड़ती है, और पक्की सड़क न होने की वजह से आज दोनों ही स्कूलों में छात्रों की संख्या भी काफी कम होती जा रही है। इस सड़क के न बनने के कारण स्थानीय लोग अपने बच्चों को प्राईवेट स्कूल में भेजने को मजबूर हैं। आखिर आजादी के 71 साल बाद भी स्कूल जाने वाले बच्चे कीचड़ में चलने को मजबूर है, तो सरकारी मशीनरी पर सवाल उठना लाजमी है. आखिर “ऐसे कैसे पढ़ेगा इण्डिया,और कैसे आगे बढ़ेगा इण्डिया।

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