आखिरी बार पत्नी से बोले थे : बर्फबारी हो रही है, 2-3 दिन फोन नहीं कर पाया तो मेरी चिंता मत करना

देहरादून : चमोली जिले के मूल निवासी और वर्तमान में देहरादून के अंबीवाला में रह रहे सेना का हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी कुछ दिन पहले लापता हो गए थे। बाद में पता चला कि वो बर्फ में फिसलकर पाकिस्तान के क्षेत्र में पहुंच गए हैं। तब से ही उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। सूचना मिलने के बाद से ही उनके परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन उनके सकुशल वापस लाने की मांग कर रहे हैं।

परिवार वाले और पड़ोसी-क्षेत्र के लोग कर रहे वापस लौटने की दुआ

वहीं बच्चे बार-बार टीवी चैनल देख रहे हैं कि कब पिता के मिलने की खबर चलेगी। राजेंद्र के बचपन के दोस्त भी उसके परिवार को दिलासा देने के लिए उनके घर पहुंचे. बच्चों का रो रोकर बुरा हाल है.राजेंद्र के परिवार वाले, पड़ोसी और गांव के, क्षेत्र के लोग उसके वापस आने की दुआ कर रहे हैं।

आखिरी बार पत्नी से बोले थे : 2-3 दिन फोन नहीं कर पाया तो मेरी चिंता मत करना

वहीं जानकारी में हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की पत्नी राजेश्वरी देवी ने बताया कि राजेंद्र ने आखिरी बार 8 जनवरी को फोन किया था। थोड़ी सी बातचीत में राजेंद्र सिंह ने कहा कि यहां गुलमर्ग में भारी बर्फबारी हो रही है और यहां जनरेटर भी खराब है अगर 2-3 दिन फोन नहीं कर पाया तो मेरी चिंता मत करना। वहीं इसी के साथ राजेंद्र सिंह ने अपने पैतृक गांव पजियाणा मल्ला में अपनी मां को भी फोन किया था और कहा था कहा कि वह बहन के साथ देहरादून घूमकर आ जाए। इसके बाद राजेंद्र सिंह का फोन नहीं आया।

जवान को आधुनिक हथियारों का काफी ज्ञान

मिली जानकारी के अनुसार 40 साल के राजेंद्र सिंह 2001 में लैंसडौन में सेना में भर्ती हुए जो कि अलग-अलग पोस्टों पर तैनात रहे। अप्रैल 2019 तक वह देहरादून के गढ़ीकैंट में तैनात रहे, जिसके बाद उन्हें गुलमर्ग भेजा गया। राजेंद्र सिंह ने आर्मी से जुड़े काफी कोर्स किए हैं, जिस कारण उन्हें आधुनिक हथियारों का भी ज्ञान है। इसलिए उन्हें वर्तमान में पोस्ट इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

पिता के वापस लौटने की दुआ कर रही बेटी

जानकारी मिली है कि हवलदार राजेंद्र चार भाई है जिसमे से तीन भाई मजदूरी करते हैं। वो अकेले ही सरकारी नौकरी कर रहे हैं और घर के इकलौते कमाने वाले हैं। जवान के पिता रतन सिंह नेगी भी घर में खेतीबाड़ी का काम करते हैं। उन्होंने 2015 में अंबीवाला स्थित सैनिक कॉलोनी प्रेमनगर में अपना घर बनाया था और परिवार वहीं रह रहा था. बेटी आईएमए केवी स्कूल मे पढ़ाई कर रही है और बस पिता के सही सलामत होने और वापस आने की दुआ कर रही है।

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