भूखे लोगों के लिए ‘भगवान’ बने खैरा बाबा, 20 लाख लोगों को खिला चुके खाना

लॉकडाउन ने न जाने कितने लोगों को बेघर कर दिया, भूखे-प्यासे प्रवासी मजदूर अपने गृह राज्यों की तरफ पैदल ही चल पड़े। इस दौरान बड़ी संख्या में मददगार भी आगे आए, जिन्होंने प्रवासी मजदूरों के दर्द को कम करने की कोशिश की। कुछ इसी तर्ज पर नैशनल हाईवे-7 पर करणजी के नजदीक सड़क के किनारे टीनशेड डालकर लोगों की मदद की जा रही है। 81 वर्षीय बाबा करनैल सिंह खैरा, जिन्हें क्षेत्र में खैरा बाबा के नाम से भी जाना जाता है, लोगों को लंगर खिलाने में जुटे हुए हैं। इस लंगर के अलावा 450 किलोमीटर क्षेत्र में न तो कोई होटेल है और न ही ढाबा। ऐसे में बस हो, ट्रक हो या टेम्पो या फिर पैदल चलने वाले लोग, हर गुजरने वाला राहगीर यहां खाना खाता है. उनको खाने के लिए पैसे भी नहीं देने पड़ते।

खैरा बाबा कहते हैं, ‘यह सुनसान क्षेत्र है। हम जिस जगह हैं, इससे पीछे तकरीबन 150 किलोमीटर तक और आगे तकरीबन 300 किलोमीटर तक न तो कोई ढाबा है, न ही कोई रेस्ट्रॉन्ट। ऐसे में कई लोग गुरु का लंगर चखने के लिए रुकते हैं। इसके साथ ही हम बिना किसी भेदभाव के हर वक्त लोगों को खाने-पीने की चीजें उपलब्ध कराते हैं। NBT की एक रिपोर्ट के अनुसार खैरा बाबा ने कहा, ‘हमारे पास बड़ी संख्या में लोग आते हैं, हम उनके लिए लगातार खाना बना रहे हैं। हम चेहरे पर मुस्कान के साथ, हाथ जोड़कर उन सभी का स्वागत करते हैं। हमें लोगों की जाति या धर्म से लेना-देना नहीं है। हमारे लिए वे सभी इंसान हैं। हमारी टीम में 17 सेवक हैं, जिनमें 11 रसोइए हैं और अन्य अलग-अलग कामों में मदद करते हैं। हम इस बात को आश्वस्त करते हैं कि लोगों को ताजा और गरमागरम खाना मिलता रहे।’ हां, इन सबके बीच यहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का भी खास ख्याल रखा जाता है।

अब सवाल यह उठता है कि इस लंगर के लिए आर्थिक सहयोग कहां से आता है तो इसका भी जवाब जान लीजिए। दरअसल, खैरा बाबा के छोटे भाई गुरबख्श सिंह खैरा अमेरिका के न्यू जर्सी में रहते हैं। वह खुद और स्थानीय सिख समुदाय के लोगों के साथ मिलकर इस पुण्य कार्य में खैरा बाबा की मदद करते हैं ताकि ‘गुरु का लंगर’ चलता रहे और लोगों को भूखा न रहना पड़े। इस सेवा कार्य में नाश्ते में लंगर के जरिए लोगों को ब्रेड या बिस्कुट और चाय दी जाती है और खाने में सादा चावल, दाल, आलू की सब्जी परोसी जाती है। हां, लोगों की साफ-सफाई के लिए उन्हें साबुन भी उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे अच्छी तरह से अपने हाथ धुलकर खाना खाएं।

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