सरकार को अस्थिर करने और झूठी खबर छापने के आरोप में पत्रकार गिरफ्तार

उत्तराखंड की त्रिवेंद्र रावत सरकार को अस्थिर करने और भ्रामक खबरें प्रसारित करने के आरोप में देहरादून पुलिस ने एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अन्य की तलाश जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 31जुलाई 2020 को डॉ. हरेन्द्र सिंह रावत निवासी एस-1, डी-6 डिफेंस कालोनी देहरादून ने थाना नेहरूकालोनी पुलिस को लिखित तहरीर देते हुये बताया की वह एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं तथा वर्तमान में कालेज आफ एजुकेशन, मियावाला में प्रबन्धक के पद पर नियुक्त हैं।

कुछ समय पूर्व उनके एक परिचित ज्योति विजय रावत द्वारा उन्हें जानकारी दी कि उमेश शर्मा नामक एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें उनके तथा उनकी पत्नी श्रीमती सविता रावत के बैंक खातों में नोटबंदी के दौरान झारखण्ड से एक व्यक्ति अमृतेश चौहान द्वारा स्वंय को झारखण्ड गौ- सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने की एवज में रिश्वत की धनराशि त्रिवेन्द्र सिंह रावत को देने हेतु भेजी गयी तथा धनराशि के लेन-देन से सम्बन्धित कुछ कूटरचित दस्तावेज भी वीडियों के माध्यम से दर्शित किये गये, साथ ही उनकी पत्नी का मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड की धर्म पत्नी की सगी बडी बहन होने का दावा किया गया।

उमेश शर्मा व अमृतेश चौहान द्वारा अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी निजि सूचनाओं को गैरकानूनी तरीके से प्राप्त करते हुए सार्वजनिक किया। इस सम्बन्ध में उनके द्वारा अपने ऊपर उमेश शर्मा द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच हेतु लिखित प्रार्थना पत्र वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मुख प्रेषित किया गया, जिस पर राजपत्रित अधिकारी द्वारा वीडियो में उल्लेखित सभी तथ्यों की जांच की गयी तथा जांच में उक्त सभी तथ्य व दस्तावेज कूटरचित पाये गये।

उमेश शर्मा द्वारा अपने अन्य साथियों के माध्यम से इस प्रकार की असत्य तथा निराधार व कपटपूर्ण खबरें अपने समाचार चैनल, पोर्टल पर चलायी गयी तथा अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करते हुए उनकी छवि को धूमिल करते हुए सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया गया।
चूंकि उक्त मामला अत्यंत गम्भीर प्रवृत्ति का था, जिस पर तत्काल अभियोग पंजीकृत करते हुए टीम गठित की गयी। गठित टीम द्वारा विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन की कार्यवाही करते हुए वादी तथा गवाहों के बयान लिये गये तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखीय साक्ष्यों तथा उक्त प्रसारित वीडियो व पुरानी पत्रावलियों का गहनता से अवलोकन किया गया। साक्ष्यों के अवलोकन से पाया गया कि उमेश शर्मा द्वारा अमृतेश चौहान, शिव प्रसाद सेमवाल तथा राजेश शर्मा के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत सरकार को अस्थिर करने तथा सरकार व मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के विरूद्ध आम जन-मानस में भ्रान्ति, अप्रीति तथा घृणा उत्पन्न करने के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेजों को प्रदर्शित करते हुए उक्त भ्रामक वीडियो प्रसारित किया गया तथा लगातार अपने सामाचार चैनल, पोर्टल व समाचार पत्र के माध्यम से झूठी व भ्रामक खबरें प्रसारित की गयी।

जिस पर तत्काल अभियुक्तगणों की गिरफ्तारी हेतु एक टीम गठित की गयी तथा गठित टीम उक्त अभियोग में अभियुक्त राजेश शर्मा को रात्रि सुमन नगर, चोरखाला से गिरफ्तार किया गया। अन्य अभियुक्तों की यथाशीघ्र गिरफ्तारी हेतु टीम को निर्देशित किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त को आज न्यायालय के समक्ष पेश किया जायेगा।

अभियोग की गम्भीरता के दृष्टिगत अभियोग के समयबद्ध विधिक निस्तारण हेतु पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा पुलिस अधीक्षक अपराध के पर्यवेक्षण में एसआईटी गठित की गयी है, जिसमें उप निरीक्षक दिलबर सिंह नेगी थानाध्यक्ष नेहरू कालोनी, उप निरीक्षक धर्मेन्द्र रौतेला थानाध्यक्ष प्रेमनगर, उप निरीक्षक नत्थीलाल उनियाल थानाध्यक्ष बसन्त विहार, उप निरीक्षक आशीष रावत चौकी प्रभारी बाईपास तथा कां. दीप प्रकाश को नामित किया गया है।

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