अपनी दुर्लभ बिमारी पर इरफान ने जारी किया बयान, जानिए क्या है ये बिमारी और इसका इलाज

मुंबई। फिल्म अभिनेता ने उनको हुई ‘दुर्लभ’ बीमारी का ख़ुलासा करते हुए एक बयान जारी कर अपनी बीमारी के बारे में बताया है और लोगों से अपील की है कि वो उनकी बीमारी को लेकर अफवाहों के फेर में ना आयें।

इरफ़ान ने अपने इस बयान में लिखा है– जैसा कि कुछ दिनों से हो रहा है, कुछ अप्रत्याशित होना हमें आगे बढ़ने का अवसर देता है l मुझे पता चला है कि मुझे ‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’ है। और इस बात पर विश्वास करना सचमुच मुश्किल है। लेकिन मेरे आसपास के लोगों के प्यार और प्रार्थनाओं और मेरे भीतर के विश्वास ने उम्मीदों को जगाये रखा है।

मैं अब अपना ईलाज कराने के लिए विदेश जा रहा हूं और मेरी सबसे अपील है कि वो मेरे लिए अपनी विशेज भेजते रहें. जैसा कि हर जगह इस तरह की अफवाहें फैली हैं कि न्यूरो का संबंध हमेशा ब्रेन से ही होता है और गूगल ही इसके सर्च का आसान रास्ता है.

जिन लोगों ने मेरी बीमारी के बारे में मेरे बयान के आने का इंतज़ार किया, उनके लिए मैं ये कहे जा रहा हूं कि मैं आपको और भी बहुत सारी कहानियां सुनाने के लिए वापस आऊंगा”। इरफ़ान के इस बयान से स्पष्ट है कि उनकी बीमारी गंभीर है लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात की अटकलों को भी विराम दे दिया है कि उनका मर्ज़ दिमाग (ब्रेन) से ही जुड़ा है।

है क्या ये बीमारी

‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’  एक अलग प्रकार का कैंसर होता है। इसे पता लगाने के लिए विशेष प्रकार की जांच प्रक्रिया ”क्रोमोग्राफिन ऐसे” और ”क्रोमेटिन टेस्ट” किया जाता है। इसके बाद इसके प्रायमरी या सेकंडरी स्टेज का पता लगाया जा सकता है। इसमें पीनेट ट्यूमर की उत्पत्ति अमूमन कोलोन, फेफड़ों में या फिर शरीर के किसी और भाग में होती है। अगर इसे डायग्नोस किया जा चुका है तो यह देखना जरूरी हो जाता है कि यह लोकलाइज्ड(सिर्फ किसी सीमित दायरे में) है या फिर शरीर में फैला हुआ है।

ठीक कैसे होती है

इस बीमारी का आमतौर पर ट्रीटमेंट कीमोथैरेमी के जरिए ही होता है। कई बार पीईटी स्कैन भी किया जाता है लेकिन अगर यह बीमारी दिमाग में फैली है तो इसका पता इस स्कैन से नहीं चलता। इम्यूनो हिस्ट्रो केमेस्ट्री के बाद इस बीमारी के बारे में पूरी जानकारी मिल पाती है। जहां तक बात ट्रीटमेंट की है तो इसमें काफी समय लगता है। इस बात पर भी यह निर्भर करता है कि बीमारी शरीर के किस हिस्से में है।

यह बीमारी अमूमन फैलने वाली होती है जिसका ट्रीटमेंट लंबे समय तक चलता है। ट्रीटमेंट के दौरान कई बार एेसी बीमारी में रेडिएशन का उपयोग भी किया जाता है।

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