इंदिरा अम्मा भोजनालय बन सकती है पंडित दीनदयाल जी की कैंटीन

ब्यूरो- महान नाटककार शेक्सपियर ने लिखा था ‘नाम में क्या रखा है’। बावजूद इसके उत्तराखंड में सरकारें नाम पर बहुत गौर करती हैं। राज्य उत्तरांचल के नाम से बना तो पहली निर्वाचित सरकार ने सूबे का नाम उत्तराखंड बदल दिया। लाखों रुपए नाम पट बदलने में खर्च हुए। पेंटिंग और नाम पट बनाने का ठेका लेने वाले ठेकेदारों ने मोटा मुनाफा कमाया।

तब से लेकर अब तक सूबे में नाम बदलने का सिलसिला जारी है। सूबे में सरकारों का ध्यान काम उतना नहीं रमता जितना नाम बदलने में लगता है। अब खबर है कि  सूबे में सहकारिता की मिसाल बनकर बेरोजगार महिलाओं के लिए रोजगार का साधन उभरकर साबित होने वाली और जनता को सस्ता भोजन मुहैय्या करवाने वाली इंदिरा अम्मा भोजनालय का नाम बदला जा सकता है।

इंदिरा अम्मा का नाम एकात्म मानववाद के विचारक और जनसंघ के प्रणेता दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर दीनदयाल गरीब भोजनालय या इसी तर्ज पर रखा जा सकता है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष के शुभ मौके पर ऐसा हो सकता है। दरअसल सरकार के पास योजनाओं के नाम बदलने का अधिकार होता है।

तय है कि भाजपा राज में कांग्रेस राज के इंदिरा अम्मा भोजनालय पंडित  दीनदयाल उपाध्याय की कैंटीन बन जाए।

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