
India EU Trade Deal: आज मंगलवार यानी 27 दिसंबर को भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हो गया है। 16वें भारत-EU समिट के दौरान भारत और यूरोपीय यूनियन के नेताओं ने इसका ऐलान किया। व्यापारी संगठन CTI ने भी इस ट्रेड डील का स्वागत किया है। EU
इस ट्रेड एग्रीमेंट के बाद दिल्ली और देश में व्यापारियों और उद्यामियों के शीर्ष संगठन CTI यानी चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने इस पर खुशी जताई है। अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के बीच हुई ये ट्रेड एग्रीमेंट भारतीय कंपनियों के लिए नया बाजार खोलेगी।
EU और भारत के बीच हुई फ्री-ट्रेड डील India EU Trade Deal
इस ट्रेड डील पर CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि इससे भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, केमिकल, समुद्री उत्पाद, डेयरी उत्पाद, कृषि उत्पाद और मोटर पार्ट्स आदि चीजों पर पहले लगने वाले आयात शुल्क से अब बड़ी राहत मिलेगी।
‘निर्यात 50 अरब डॉलर तक हो सकता है’- CTI चेयरमैन
CTI चेयरमैन ने बयान जारी कर रहा कि यूरोपियन यूनियन देशों के साथ हुई इस ट्रेड डील से भारत का इन देशों को निर्यात 50 अरब डॉलर तक हो सकता है। जिससे टेक्सटाइल, चमड़ा,फुटवियर आदि इंडस्ट्री को जबरदस्त बूस्ट मिलेगी।
भारत के सामानों की EU में बढ़ेगी डिमांड
उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत के सामान पर 50 % टैरिफ लगाने की भी बात की। उन्होंने कहा अमेरिकी टैरिफ से भारत के व्यापारियों को अमेरिका से ऑर्डर मिलना हो गए। हालांकि अब इसके बाद यूरोपियन यूनियन के 27 देशों में भारत के सामान की डिमांड बढ़ेगी। साथ ही भारत वहां पर अपनी इंडस्ट्रीज भी स्थापित कर सकेगा।
यूरोप से आने वाली गाड़िया होंगी सस्ती
गोयल ने बताया कि इससे भारत में यूरोप से आने वाली गाड़िया भी सस्ती मिलेंगी। बताते चलें कि पहले गाड़ियों पर 35.5% , प्लास्टिक पर 10.4% दवाइयों पर 9.9% टैरिफ लगता था। अब टैरिफ के कम होने पर ये सारे सामान सस्ते मिलेंगे।
अमेरिकी टैरिफ से 48 अरब डॉलर का भारतीय निर्यात प्रभावित
उन्होंने बताया कि अमेरिका के 50% टैरिफ से भारत की टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, फार्मा, सीफूड, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि सेक्टरों पर बुरा असर देखने को मिला। जिससे देश में 10 लाख लोगों के रोजगार पर संकट आ गया।
इन टैरिफों के चलते बाकी देशों के मुकाबले भारत का सामान अमेरिका में 35% महंगा मिल रहा है। जिसकी वजह से वहां के खरीददार भारत के सामान को छोड़ बाकी देशों के सामान को तवज्जों दे रहे है। इससे 48 अरब डॉलर से ज्यादा का भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ था।