उत्तराखंड के इस गांव में बिना इलाज मर गई महिलाएं, कई अन्य बीमार

पिथौरागढ़ जिले में एक ऐसा भी गांव है जहां बीमार लोगों तक न डाक्टर पहुंच पा रहें हैं और न ही बीमार अस्पताल तक पहुंच पा रहें हैं। अमर उजाला में प्रकाशित एक खबर के मुताबिक लिंगुरानी ग्राम पंचायत के तोक भूनी में सड़क नहीं होने गांव के छह रोगियों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसी गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं की अस्पताल लाते वक्त रास्ते में ही मौत हो गई थी। इन दोनों महिलाओं को ग्रामीण डोली में बैठाकर सीएचसी बेड़ीनाग ला रहे थे। हाल यह है कि गांव में अभी तक डाक्टरों की टीम भी नहीं पहुंची है। दो दिनों पहले यहां आशा वर्कर और एएनएम पहुंचीं।

भूनी तोक में करीब 40 परिवार रहते हैं। बेड़ीनाग से यह तोक करीब 13 किलोमीटर दूर है। गांव के लोगों को नजदीक के बेड़ीनाग अस्पताल तक पहुंचने के लिए तीन किलोमीटर पैदल और दस किलोमीटर वाहन से सफर करना पड़ता है। शनिवार रात यहां बुजुर्ग महिला जयंती देवी और धरमा देवी की तबियत बिगड़ी तो ग्रामीण उन्हें डोली में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाने लगे। दोनों बीमार महिलाओं ने पैदल रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

गांव में अभी मृतका जयंती देवी के पति फकीर सिंह (80) , हरुली देवी (70) और अन्य चार लोग बीमार हैं। गांव के लोग इन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सोमवार को यहां एएनएम देवकी धानिक और आशा सीता भौंरियाल पहुंची। प्रशासन का कहना था कि यहां डाक्टरों की टीम भेजी जाएगी। यह ऐलान करने के बाद भी यहां डाक्टरों की टीम नहीं पहुंची।

ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराज हैं कि सड़क कई वर्ष पूर्व स्वीकृत होने के बावजूद अभी तक नहीं बनी है। ग्रामीण इस मांग को लेकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। इनका कहना है कि सड़क 2014 में स्वीकृत हो गई थी लेकिन अभी तक नहीं बनी। क्षेत्र पंचायत सदस्य बहादुर सिंह बोहरा ने बताया कि वन भूमि के पेंच में सड़क निर्माण अटका हुआ है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसडी पांडेय ने बताया कि सड़क का मामला वन भूमि हस्तांतरण में अटका है।

महिलाओं की मौत की खबर आने के बाद अब प्रशासन ने तोक में स्वास्थय शिविर लगा कर बीमार लोगों को दवाएं उपलब्ध कराईं हैं।

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