IAS की पत्नी 15 साल बाद लौटी ससुराल, बनी गांव की मुखिया, बदल दी तस्वीर

बिहार: समाज के लिए काम करने लोग कम ही मिल पाते हैं। खुद के लिए जीने वालों की कोई कमी नहीं है। आपको ऐसी ही एक महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन के बल पर अपने पूरे गांव की तस्वीर ही बदलकर रख दी। बिहार के सिंहवाहिनी की रितू जायसवाल आईएएस अफसर अरुण कुमार की पत्नी हैं और समाज की भलाई करने के लिए जानी जाती हैं। उनके गांव में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है, लेकिन अपने गांव की ऐसी तस्वीर बनाना उनके लिए इतना आसान नहीं था।

शादी के 15 साल बाद अपने ससुराल आईं

शादी के 15 साल बाद अपने ससुराल आईं तो वह गांव का पिछड़ापन देखखर काफी परेशान हो गईं। गांव में ना तो बिजली थी और ना सड़क। रितू से ये सब देखा नहीं गया और उन्होंने गांव को इस पिछड़ेपन से निकालने की ठान ली। रितू ने मुखिया बनने के बाद गांव के विकास के लिए काफी काम किया। रितू बिहार के सीतामढ़ी जिले के सिंघवाहिनी पंचायत की मुखिया हैं। सड़क बनाने के लिए लोग अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन उन्हें बड़ी मशक्कत के बाद मनाया गया।

हर काम की खुद करती हैं निगरानी

विकास के सभी कामों की निगरानी खुद करती हैं। इस दौरान वह कभी बाइक चलाती दिखती हैं, तो कभी ट्रैक्टर और जेसीबी पर सवार दिखती हैं। उनके पति 1995 बैच के आईएएस (अलायड) अरुण कुमार हैं। शादी के 15 साल तक जहां भी उनके पति की पोस्टिंग होती थी, वह साथ जाती थीं। लेकिन, 15 साल बाद उन्होंने अपने पति से ससुराल जाने की बात की और उनके घर के सभी लोग नरकटिया गांव जाने के लिए तैयार हो गए। तभी रास्ते में गांव पहुंचने से कुछ दूरी पर उनकी गाड़ी कीचड़ में फंस गई। जब काफी कोशिशों के बाद भी गाड़ी कीचड़ से नहीं निकली तो बैलगाड़ी पर सवार होना पड़ा।

चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड का पुरस्कार

कुछ दूर जाते ही वो भी कीचड़ में फंस गई। यहीं से उन्होंने गांव की सूरत बदलने की ठान ली। रितू ने विकास की शुरुआत गांव की लड़कियों को पढ़ाने से की। 2015 में नरकटिया गांव की 12 लड़कियों ने पहली बार मैट्रिक की परीक्षा पास की। 2016 में रितू ने सिंहवाहिनी पंचायत से मुखिया पद के लिए चुनाव लड़ा। रितू के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए 32 उम्मीदवार थे। जिसमें, उन्हें जीत मिली। सिंघवाहिनी पंचायत 2016 में खुले में शौच से मुक्त हो गया था। गांव में बिजली भी पहुंच गई है। गांव में बच्चों का समूह बनाकर उन्हें मुफ्त में शिक्षित किया जा रहा है। उन्हें पढ़ाने वाली भी गांव की ही लड़कियां हैं। रितू का कहना है कि उन्होंने पहले 20 लड़कियों को प्रशिक्षित किया था। पंचायत में बेहतर काम के लिए दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्डसे भी नवाजा है। ये कार्यक्रम इंटरेक्टिव फोरम ऑन इंडियन इकोनॉमी ने आयोजित किया था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here