पति की चोटी बनी तलाक का कारण, MBA पास पत्नी पहुंची कोर्ट, कहा- गंवार दिखाई देेते हैं

एक ब्राह्मण परिवार के पुरुष की चोटी ने उसके मुसीबत खड़ी कर दी औऱ मामला कोर्ट तक पहुंच गया. जी हां मामला भोपाल के अरेरा कॉलोनी का है…जहां पत्नी ने शादी के तीन साल बाद तलाक के लिए आवेदन दिया वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उसका पति सिर पर चोटी रखता है. पति के साथ उसका चोटी को हटाने को लेकर विवाद चल रहा था लेकिन पति हटाने से मना कर रहा था इस कारण पत्नी इतनी नाराज हो गई कि मामला फैमिली कोर्ट में पहुंचा.

मेरे पति चोटी रखने के कारण गंवारों की तरह दिखाई देते हैं

कोर्ट में पत्नी ने कहा कि मेरे पति चोटी रखने के कारण गंवारों की तरह दिखाई देते हैं। उसके मायके वाले पति का मजाक उड़ाते हैं, जिससे उसे काफी अपमानित होना पड़ता है। जबकि पति का कहना है कि उसने मन्नत रखी है कि वह चोटी रखेगा औऱ ये चोटी उसके मरते दम तक रहेगी.

पति इंजीनीयर औऱ पत्नी एमबीए पास

आपको बता दें कि इस मामले में पति एक्जीक्यूटिव इंजीनीयर है और पत्नी एमबीए पास है. पत्नी का कहना है कि चोटी के कारण उसका पति गंवार जैसा लगता है औऱ इसके स्टैंडर्ड का नहीं है.

2 फरवरी 2016 को हुई थी शादी,सास और ससुर की सड़क हादसे में हो गई थी मौत 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला की शादी 2 फरवरी 2016 को हुई थी। शादी के साल तो सब कुछ अच्छा रहा। दो साल बाद उसके सास और ससुर की मौत सड़क हादसे में हो गई थी। मृत्यु के कर्मकांड के दौरान पति का मुंडन हुआ। उसमें पति ने धार्मिक मान्यता के अनुसार शिखा यानी चोटी रख ली। उसके बाद जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर आई। इसके बाद जब पति ने चोटी नहीं कटाई तो उसने टोकना शुरू किया। महिला ने काउंसलर को बताया कि पति को चोटी कटाने कहते तो वह बात को टाल जाते हैं। चोटी रखने से सब पति को पंडितजी कहने लगे। इस बात को लेकर उनमें झगड़ा बढ़ता गया।

पति ने ठान ली है कि वह कभी अपनी चोटी नहीं कटाएगा-पत्नी

कोर्ट में पत्नी ने कहा कि उसके पति ने ठान ली है कि वह कभी अपनी चोटी नहीं कटाएगा। उसकी चोटी मौत के बाद शरीर के साथ जलेगी। इधर, पति का कहना है कि पत्नी को सारे सुख हैं। वह उसकी चोटी के पीछे पड़ी है। इसको लेकर पत्नी छह माह से मायके में है। पत्नी की जिद है कि सिर पर चोटी रखो या तलाक दो।

युवक का कहना है कि उसने माता-पिता की मौत के बाद संकल्प लिया था कि वह चोटी रखेगा। यह उसकी धार्मिक मान्यता है। वह अपने परिवार में इकलौता बेटा है। उसे सभी मान्यताओं का पालना करना पड़ता है। उसका कहना है कि इससे उसे सुख भी मिलता है। दोनों एक-दूसरे की बात सुनने तैयार नहीं हैं। इस मामले में दूसरी काउंसलिंग कराई जा रही हैं। कोर्ट को उम्मीद है मामले में काउंसलिंग के माध्यम से समझौता हो जाएगा।

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