उत्तराखंड में नहीं है एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम, हेली सेवा मुश्किल : नागरिक उड़यन विशेषज्ञ

देहरादून : उत्तराखंड में जितना मुश्किल सफर पहाड़ी सड़को से होकर गुजरना है उससे कई ज्यादा खतरनाक मुश्किल हवाई सफर से गुजरना है। उत्तरकाशी के आराकोट में आपदा राहत कार्यो में लगे 2 हेलीकाॅप्टर 3 दिन के भीतर क्रैश हुए हैं, जिसमें 21 अगस्त को क्रैश हेलीकाॅप्टर में 3 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं आज फिर ऐसा ही हादसा होने से टला वो भी पायलट की सूझबूझ से. इस हादसे में पायलट को चोटें आई है.

एक के बाद एक हो रहे हेलीकॉप्टर क्रैश हादसे से समझा जा सकता है कि आखिर राहत बचाव कार्यों में लगे हेलीकाॅप्टर के लिए कार्य करना कितना मुश्किल है. अगर आंकड़ों की बात करें तो पिछली 9 साल में आज क्रैश हुए हेलीकाॅप्टर समेत 10 तक ये आंकड़ा पहुंच गया है।

वहीं इस पर नागरिक उड़यन विशेषज्ञ राजीव धर का कहना कि उत्तराखंड में ज्यादा तक जो हेलीकाॅप्टर क्रैश हुए हैं उनमे राडर सिस्टम न होना है. साथ ही उत्तराखंड में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम ही नहीं है जिससे हेली सेवा चलाना आसान नहीं है।

वहीं नगरिक उड़यन सचिव दिलिप जावलकर का भी कहना है कि उत्तराखंड में उड़ान भरना दिक्कत भरा है. साथ ही राहत कार्यो में हेलीकाॅप्टर की ज्यादा आवश्यकता है जिस समय कोई और रास्ता भी सरकार के पास नहीं होता। लेकिन उससे बाद में भी सरकार डीजीसीए के मानकों का पूरा ध्यान हेलीकाॅप्टर को संचालित करने के लिए देती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here