हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हरदा मुख्यमंत्री तो बनना चाहते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने से डरते हैं : जोशी

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देहरादून : कांग्रेस में सीएम चेहरे को लेकर सस्पेंस जारी है। हरीश रावत से कई बार इस बारे में सवाल भी पूछा गया लेकिन उन्होंने साफ कहा कि हाईकमान इसका फैसला करेगा। लेकिन जिस तरह से वो चुनाव के मैदान डटे हैं और फील्डिंग कर रहे हैं उससे साफ है कि वो खुद को सीएम चेहरा मानते हैं हालांकि उन्होंने मीडिया के सामने कभी साफ नहीं कहा।

वहीं अब भाजपा के नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस की प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत के चुनाव लड़ने पर चुटकी ली है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि चुनावों में हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हरदा मुख्यमंत्री तो बनना चाहते हैं, लेकिन चुनाव लड़ने से डरते हैं। सुरेश जोशी ने कहा कि एक तरफ हरदा मुख्यमंत्री बनने की लालसा में भगवान बदरी विशाल से लेकर अपनी पार्टी के दिल्ली दरबार तक में प्रार्थना कर रहे हैं, वहीं दूसरी स्वयं चुनाव में उतरने से डर रहे हैं। हरदा को बहाने बनाने के बजाय स्वीकारना चाहिए कि हार का अंदेशा उन्हें चुनाव लड़ने से रोक रहा है।

सुरेश जोशी ने कहा कि उन्हें एहसास है कि सत्ता व विपक्ष, दोनों भूमिकाओं में कांग्रेस की नाकामी जनता देख चुकी है। ऐसे में चुनाव में उतरे तो हार तय है और वे हार कर अपनी राजनीतिक पारी का अंत नहीं करना चाहते।कहा कि पिछले 30 वर्ष में हरीश रावत छह लोकसभा चुनाव हार चुके हैं। इसमें वह पांच बार स्वयं और एक बार उनकी पत्नी चुनाव हारी। विधानसभा चुनाव में एक बार वर्ष 2014 में धारचूला से जीतने के बाद रावत दो सीटों से चुनाव हार चुके हैं और वह भी मुख्यमंत्री रहते हुए। उन्होंने कहा कि हरदा अब अपने प्रचार प्रबंधकों के बूते उत्तराखंड की चाहत होने का भ्रमजाल खड़ा करना चाहते हैं। इंटरनेट मीडिया पर ‘सारा उत्तराखंड हरदा संग’ अभियान चला रहे हैं। हकीकत ये है कि स्वयं उनकी पार्टी उनके साथ नहीं है।

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