मरते-मरते कई लोगों को जिंदगी दे गया सेना का जवान, उत्तराखंड पुलिस को सलाम

देहरादून : एक युवा सेना में भर्ती होने के बाद सालों तक अपनी जान की परवाह किए बिना देश की सेवा करता है लेकिन कई ऐसे सैनिक भी हैं जो देश की सेवा करने के बाद अपनी प्राणों की आहूति भी देता है और जाते-जाते कई लोगों को जिंदगी दे जाता है. आपको अगर इसकी पूरी जानकारी चाहिए तो आप हिंदी फिल्म ट्रैफिक जरुर देखें. जिसे देख आपकोपता चल जाएगा की ग्रीन कॉरीडोर क्या होता है औऱ कैसे सेना-पुलिस-स्वास्थय विभाग की मदद से इसको अंजाम दिया जाता है.

कई लोगों को जिंदगी दे गया सेना का जवान

जी हां ऐसा ही हुआ उत्तराखंड,देहरादून में…जहां एक सेना के जवान को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया है और वो सेना का जवान 5 लोगों को जिंदगी दे गया. यहां के मिलिट्री हॉस्पिटल में ब्रेन डेड घोषित कर दिए गए सेना के जवान के अंगों को ग्रीन कॉरीडोर बनाकर दिल्ली के एक अस्पताल को भेजा गया है, जहां जवान के अंगों को वहां भर्ती मरीजों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

देहरादून पुलिस की मदद से आसानी से हो पाया काम, हर तरफ हो रही तारीफ

वहीं खास बात ये थी की देहरादून पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरीडोर बनाकर सिर्फ 30 मिनट में जवान के अंगों को मिलिट्री हॉस्पिटल से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचाया गया। जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।

सैन्य अफसरों और देहरादून एसएसपी मुख्य भूमिका

एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि शुक्रवार को मिलिट्री अस्पताल में भर्ती सेना के एक जवान को ब्रेन डेड घोषित कर दिया, लेकिन उसके शरीर के बाकी अंग ठीक काम कर रहे थे। इस पर सेना अफसरो ने जवान के अंग दिल्ली के आरव अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। दिल्ली के आरव अस्पताल में भर्ती मरीजों को जवान के अंगों को प्रत्यारोपित करने की तैयारी की गई लेकिन इसके लिए बेहद कम समय में जवान के अंगों को दिल्ली पहुंचाया जाना था। सैन्य अफसरों से इसे लेकर देहरादून एसएसपी निवेदिता कुकरेती की मदद से फौरन मिलिट्री अस्पताल से जौलीग्रांट एयरपोर्ट को जाने वाले मार्ग को जीरो जोन कराने का आदेश वायरलेस सेट पर दिया। पुलिस और यातायात पुलिस की मदद से मिलिट्री हॉस्पिटल से जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक को ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया। थानेदारों को सख्त हिदायत दी गई कि सेना के वाहन के मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट नहीं आनी चाहिए।

इस बीच खास बात ये है कि ग्रीन कॉरीडार में भारतीय सेना, वायु सेना, पुलिस और उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतरीन तालमेल नजर आया।

क्या होता है ग्रीन कॉरिडोर

ग्रीन कॉरीडोर की आवश्यकता तब पड़ती है, जब आपात स्थिति में कोई मानव अंग जैसे दिल या लिवर को प्रत्यारोपण के लिए एक से दूसरे स्थान तक कम समय में ले जाने की आवश्यकता होती है। ग्रीन कॉरीडोर अस्पताल के कर्मचारियों और पुलिस के आपसी सहयोग से अस्थायी रूप से तैयार किया जाना वाला एक रूट होता है, जिसमें कुछ देर के लिए ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से निर्धारित मार्ग पर यातायात रोक दिया जाता है या नियमित कर दिया जाता है ताकि एंबुलेंस को एक से दूसरी जगह जाने के लिए कम से कम समय लगे। ऐसे में एंबुलेंस चालक का काफी अनुभवी और प्रशिक्षित होना जरूरी होता है।

आधे घंटे का लगा वक्त

पुलिस के अनुसार सेना की ओर से ग्रीन कॉरीडोर बनाने के लिए शुक्रवार दिन में 11.20 बजे एसएसपी से संपर्क किया। एसएसपी ने महज दस मिनट के भीतर ग्रीन कॉरीडोर के लिए जरूरी इंतजाम पूरे कर दिए। 11.30 बजे मिलिट्री हॉस्पिटल से सेना का वाहन जवान के शरीर को लेकर जौलीग्रांट एयरपोर्ट के लिए निकला। एसएसपी ने बताया कि ठीक 12.00 बजे सेना का वाहन जवान का शरीर लेकर एयरपोर्ट के भीतर दाखिल हो गया।

उत्तराखंड पुलिस के उन सभी जवानों को और अफसरों को हमारा सलाम जिन्होंने सेना के साथ तालमेल बनाकर कई लोगों को नई जिंदगी देने का काम किया.

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